रामपुर के साथ अब रोहड़ू भी आरक्षित

Shimla Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
शिमला। प्रदेश के विधानसभा चुनाव के लिए इस बार ऊपरी शिमला के रामपुर के बाद रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र भी आरक्षित कर दिया गया है। इस क्षेत्र के आरक्षित होने से एक ओर जहां सालों से ओपन सीट पर चुनाव मैदान में उतर कर किस्मत आजमाने से कतरा रहे दोनों मुख्य राजनीतिक दलों के अनुसूचित जाति से संबंध रखने वालों की राह आसान हो गई है, वहीं वे आगामी चुनाव में अपने को साबित कर पाएंगे। रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र पर पुनर्सीमांकन का कोई असर नहीं पड़ा है। इसकेे सभी क्षेत्र पहले जैसे रहे हैं। रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र पूरे प्रदेश में अहम और चर्चित विधानसभा क्षेत्र रहा है। इस क्षेत्र ने पांच बार प्रदेश का नेतृत्व करने के लिए मुख्यमंत्री दिया है। वीरभद्र सिंह ने 2007 में इसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। उसके बाद उन्होंने मंडी से लोक सभा चुनाव लड़ा। बाद में वह केंद्र में मंत्री भी रहे। उनके केंद्र में चले जाने के बाद से सालों से पूर्व सीएम के खिलाफ चार बार चुनाव लड़ते रहे भाजपा के खुशी राम बालनाहटा ने सीट पर जीत दर्ज कर इतिहास रचा। अब इस सीट के आरक्षित हो जाने के बाद उन्हें विधानसभा पहुंचने के लिए दूसरे क्षेत्र की ओर रुख करना पड़ेगा। रोहड़ू और रामपुर से पूर्व सीएम का रिश्ता है, एक से वे चुनाव लड़ते रहे और दूसरा रामपुर उनका गृह क्षेत्र रहा है। रामपुर भी पिछले कई दशकों से आरक्षित ही चल रहा है। यहां हालांकि आज तक वर्चस्व लगभग कांग्रेस का ही रहा। कांग्रेस के उम्मीदवार ही अधिकतर जीत कर आए, मगर एक बार पूर्व विधायक नींजू राम को भी जनता ने जीत कर भेजा था। रामपुर में इस बार सीट भले ही आरक्षित है, मगर इस बार यहां मुकाबला रोचक होने की उम्मीद है।

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रामपुर में 65187 मतदाता
आरक्षित रामपुर विधानसभा क्षेत्र में पुनर्सीमांकन का कोई असर नहीं रहेगा। इस क्षेत्र में रामपुर तहसील और ननखड़ी उप तहसील के 65187 से अधिक मतदाता अपने मत का प्रयोग कर नुमाइंदा चुनेंगे।

रोहड़ू में 63417 मतदाता
रोहड़ू आरक्षित हुए क्षेत्र में इस बार भी रोहड़ू तहसील, चिढ़गांव, और डोडरा क्वार तहसील आती है। इन तहसीलों के 63417 मतदाता हैं।
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वीरभद्र सिंह ने रोहड़ू से 1990 में लड़ा था पहला चुनाव
शिमला। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने 1990 में पहली मर्तबा रोहड़ू ओपन सीट से चुनाव लड़ा। इसके बाद 1993, में 1998 में 2003 व 2007 में चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।

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1962 में ओपन सीट से हरदयाल ठाकुर बने विधायक
रामपुर के राजनीतिक इतिहास में एक रोचक तथ्य यह रहा है कि विधानसभा बनने के बाद से आज तक पहली मर्तबा 1962 में ओपन सीट से हरदयाल ठाकुर रामपुर के विधायक रहे। उसके बाद नालु राम, बंसत राम, नेक राम और उसके बाद नींजू राम विधायक बने। सिंघी राम छह बार 2007 तक रामपुर से जनता का प्रतिनिधित्व करते रहे। 2007 में नंदलाल चुनाव जीत कर विधानसभा गए। वहीं क्षेत्र के पंजाब में होने के समय 1962 तक रामपुर और महासु कुमारसैन से एक एक विधायक चुने जाते थे। विधानसभा बनने के बाद ही कुमारसैन अलग चुनाव क्षेत्र बना।

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