ओबराय ग्रुप के मालिक ने की थी 50 रुपये की नौकरी

Shimla Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
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शिमला। औद्योगिक घराने ओबराय ग्रुप के संस्थापक चेयरमैन राय बहादुर मोहन सिंह ओबराय ने अपना कैरियर महज 50 रुपये मासिक तनख्वाह से शुरू किया था। राय बहादुर मोहन सिंह ओबराय ने 1922 में शिमला के क्लार्क्स होटल में गेस्ट क्लर्क के रूप में काम शुरू किया। उसी दौरान उन्हें पंडित मोतीलाल नेहरू ने 100 रुपये का इनाम दिया था। कालेज की पढ़ाई छोड़कर ओबराय पाकिस्तान के भाऊन कस्बे से नंगे पांव रोजगार की तलाश में शिमला पहुंचे। वह होटल परिसर में 10 फुट, 9 फुट आकार के कमरे में ठहरते थे।
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हिमाचल पर्यटन विभाग द्वारा शिमला के अतीत के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए प्रकाशित टेबल बुक ‘हर घर कुछ कहता है’ में यह जानकारी दी गई है। यह पुस्तक पर्यटन विभाग के निदेशक एवं उपायुक्त शिमला डा. अरुण शर्मा के व्यक्तिगत प्रयासों से 10 माह की मेहनत के बाद प्रकाशित की है। पुस्तक के अनुसार मोहन सिंह ओबराय सिसिल में मैनेजर, क्लर्क, स्टोर कीपर आदि सभी कार्यभार खुद ही संभाल लेते थे। कड़ी मेहनत से उन्होंने ब्रिटिश हुक्मरानों का दिल जीत लिया था। जब ब्रिटिश मैनेजर इरनेस्ट क्लार्क छह महीने की छुट्टी पर लंदन गए तो वह क्लार्क्स होटल का कार्यभार मोहन सिंह ओबराय को सौंप गए। मोहन सिंह ने इस दौरान होटल की आक्यूपेंसी को दोगुना कर दिया। इस दौरान मोहन सिंह ओबराय तथा उनकी पत्नी ईसार देवी होटल के लिए मीट तथा सब्जियां खुद खरीदने जाते थे। उन्होंने इस बिल में 50 फीसदी की कमी ला दी। मोहन सिंह ओबराय ने अपने संस्मरण में लिखा है कि क्लार्क्स होटल में नौकरी ग्रहण करने के शीघ्र बाद ही होटल के प्रबंधन में महत्वपूर्ण तब्दीली आई। मिस्टर ग्रोव से क्लार्क ने कार्यभार संभाला। पहली बार भाग्य ने साथ दिया तथा मेरे स्टेनोग्राफी के ज्ञान के कारण मुझे कैशियर तथा स्टेनोग्राफर दोनों का पदभार मिला। किताब के अनुसार जब सिसिल होटल के मैनेजर क्लार्क ने महज 25000 रुपये में उन्हें होटल बेचने का प्रस्ताव रखा तो उन्होंने राशि का प्रबंध करने के लिए कुछ वक्त मांगा। उन्होंने राशि जुटाने के लिए अपनी पैतृक संपत्ति तथा पत्नी के जेवरात तक गिरवी रख दिए थे। उन्होंने पांच साल की अवधि में सारी राशि होटल मालिक को लौटा दी। इस तरह 14 अगस्त 1934 को होटल क्लार्क्स मोहन सिंह ओबराय का हो गया।
पंडित मोतीलाल नेहरू ने दिया था 100 रुपये इनाम
पंडित मोतीलाल नेहरू भी सिसिल होटल में आ चुके हैं। मोहन सिंह ओबराय ने लिखा है कि पंडित नेहरू ने टाइप करने के लिए एक अति महत्वपूर्ण रिपोर्ट उन्हें दी थी, जिसे मैंने पूरी रात कड़ी मेहनत के बाद पंडित नेहरू को सौंपा। उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक मुझे इनाम के रूप में 100 रुपये का नोट दिया। ये 100 रुपये मेरे लिए सौभाग्य लेकर आया था, क्योंकि इसके बाद मेरी तनख्वाह में बहुत बड़ा परिवर्तन हुआ। इस पैसे से मैंने पत्नी, बच्चों के लिए कपड़े तथा अपने लिए एक रेनकोट खरीदा।
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