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शिमला की सड़क पर नैनो से भी नन्ही कार

Shimla Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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शिमला। पेट्रोल के रेट घटे या बढ़े। इसका शिमला निवासी तेंजिन को कोई फर्क नहीं। पेट्रोल से नहीं, बिजली से चार्ज बैटरी से हिल्सक्वीन की सड़कों पर सरपट भागती है उनकी इलेक्ट्रिक कार रेवा आई। नैनो से भी नन्ही इस कार की जानकारी जो लोग नहीं रखते, वे इसे देखने-जानने को ट्रैफिक जाम तक लगा देते हैं।
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38 वर्षीय तेंजिन ने जानकारी दी - रेवा कंपनी की यह कार बंगलूरू में बनती है। अब इस कंपनी का महिंद्रा के साथ टाइअप हो गया है। बेटियों ने ही जिद की - पापा! हम ऐसी कार खरीदेंगे, जैसी किसी के पास न हो। इसे ढाई साल पहले दिल्ली में खरीदा। सड़क पर 3 लाख 60 हजार रुपये में पड़ी। साल भर यह ससुराल में दिल्ली में रही। डेढ़ साल पहले शिमला लाए। जब सड़क पर चलता हूं, तो लोग पूछते हैं - यह नैनो से भी छोटी कार क्या है? जब उन्हें मालूम होता है कि यह पेट्रोल नहीं, बिजली से चार्ज करके चलती है, तब उन्हें हैरत होती है। उन्हें लगता है कि यह तिब्बत से लाई गई होगी। यह इंडिया की कार है भाई! उनका यह सच्चाई जानकर भ्रम दूर हो जाता है। इसमें वह छह लोगों की सवारी भी करवा चुके हैं। जाखू की चढ़ाई से लेकर यह कोई भी ऊंचाई चढ़ जाती है। हालांकि, सीटें पीछे कर ऐसा लगता है कि यह दो लोगों की कार है।

इंजन नहीं, मोटर से घूमते हैं पहिए
तेंजिन बोले - इसमें इंजन नहीं मोटर है। यही पहिए घुमाती है। कार में आठ बैटरियां हैं, जिनकी क्षमता 600 सीसी इंजन की है। ये दो घंटे में चार्ज होती है। हाईकोर्ट वाली पार्किं ग में खड़ी रहती है। चार्ज भी यहीं करता हूं। एक बार चार्ज करने पर 80 किलोमीटर तक दौड़ सकती है। स्पीड 60 किलोमीटर तक। उनके पास इस कार का एसी वाला 2009 का माडल है।
न पार्किंग की समस्या, न प्रदूषण का खतरा
न तो पार्किं ग की समस्या है और न ही प्रदूषण का खतरा। यह फाइबर की है, इसलिए करंट का भी खतरा नहीं। बकौल तेंजिन, मैं तो कहता हूं, सभी शिमलावासी इसी कार को लें। तेंजिन बोले कि हिमाचल सरकार को भी इसको लेकर प्रोत्साहन देना चाहिए। ऐसा हो तो लोग पेट्रोल, डीजल वाली कारों का नाम न लें।
बेटियों को इसी से छोड़ते हैं स्कूल
तेंजिन के पिता लोबसांग यामफाल 1959 में तिब्बत से शिमला आए। तेंजिन शिमला में ही जन्मे। उनकी तीन बेटियां हैं। तारा हाल में नाम्सा आठवीं और छुकी सातवीं में पढ़ती हैं। सबसे छोटी बेटी धेनधेन शेलेडे स्कूल में फर्स्ट स्टैंडर्ड की स्टूडेंट हैं। घर माल रोड पर है। यहीं तिब्बती हैंडलूम की दुकान चलाते हैं। बेटियों को छोड़ने-घर लाने के लिए इसी कार का इस्तेमाल करते हैं।

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