लोकल बसों में परेशानी भरा सफर

Shimla Updated Thu, 12 Jul 2012 12:00 PM IST
शिमला। शहर में निजी बस आपरेटरों की मनमानी को झेलना अब शहरवासियों की मजबूरी बन गई है। अड्डे से बस में बैठो तो तब तक बस नहीं चलेगी, जब तक वह सवारियों से पूरी न भर जाए। टिकट लेने के लिए अगर खुले पैसे जेब में नहीं हों तो कंडक्टर के कड़वे वचन सुनने पड़ते हैं। समस्या यहीं समाप्त नहीं हो जाती।
बस अड्डे से समरहिल-टूटु जाना हो या फिर छोटा शिमला-न्यू शिमला की ओर, लोकल शहर में चलने वाली इन बसों में 103, आरटीओ, बैमलोई, लिफ्ट और टिंबर हाउस कोई न बैठे, ऐसी चेतावनी पुलिस वालों के सामने ही यात्री को सुननी पड़ती है।
गलती से बस में चेतावनी के बावजूद चढ़ गए, तो स्टॉपेज पर उतारना कंडक्टर और ड्राइवर के रहमोकर्म पर ही निर्भर करता है। इस तरह की समस्याएं रोजाना आम बसों में सफर करने वाले शहरवासियों को झेलनी पड़ती हैं।
राजधानी शिमला में लगभग हर लोकल रूट पर चलने वाली निजी बसों में यही समस्याएं आम सवारी को झेलनी पड़ती हैं। अब आम सवारी चूंकि छोटा सफर करती है, तो उलझे भी तो कितना, उसका समाधान भी नहीं निकलता।

टिकट देने का नहीं अधिकतर बसों में चलन
शहर में चल रही अधिकतर बसों में सवारियों से दूरी के हिसाब से पैसे तो कंडक्टर लेते हैं, मगर टिकट देने का चलन समाप्त ही हो गया है, जिस कारण नई सवारी को तो मालूम ही नहीं पड़ता कि किस स्टॉपेज का कितना किराया है।

खुले पैसे को लेकर रोजाना होती है बहस
शहर में चलने वाली बसों में हर तीसरी सवारी के साथ खुले पैसे को लेकर कंडक्टर का झगड़ना आम हो गया है।

फिर किस काम के येलो कार्ड
शिमला। राजधानी शिमला में लोकल रूटों पर सफर के लिए लोगों की पहली पसंद एचआरटीसी बसें हैं। किराये में रियायत पाने के लिए लोगों ने येलो कार्ड व स्मार्ट कार्ड बना रखे हैं, लेकिन दिक्कत यह है कि लोगों को इन बसों में सफर करने का सौभाग्य ही बहुत कम मिलता है। लोगों का कहना है कि लाल बसों के चालक हर स्टॉपेज पर रुकना भी जरूरी नहीं समझते। बुधवार को लोकल बस स्टैंड से बीसीएस की ओर 11:15 बजे से 12:10 मिनट तक एक भी एचआरटीसी की बस रवाना नहीं हुई, जबकि इस अंतराल में करीब आधा दर्जन निजी बसें बीसीएस की ओर रवाना हुईं। 12:10 मिनट पर हिमलैंड से न्यू शिमला की ओर रवाना हुई बस में कंडक्टर फ्रंट सीट पर बैठे थे। बैठते भी क्यों नही बस में सवारियां ही गिनी चुनी थीं।

नाइट सर्विस की नहीं लगती ब्रेक
लोगों का आरोप है कि रात के समय शहर से रवाना होने वाली एचआरटीसी की लांग रूट बसें लोकल स्टॉपेज पर नहीं रुकतीं। देर रात यदि लोगों को बस पकड़नी हो तो उन्हें चालकों के रहमोकरम पर रहना पड़ता है। बैम्लोई, हिमलैंड व टालैंड में बसें न रुकने के कारण लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।

किराये के नाम पर मनमानी वसूली
तय किराये से अधिक की वसूली में एचआरटीसी के परिचालक भी कम नहीं हैं। मैहली से हिमलैंड का किराया 9 रुपये तय है, लेकिन बसों में कभी 10 तो कभी 12 रुपये किराया वसूला जा रहा है।

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