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CEO Radhika Gupta: सबसे युवा सीईओ में शुमार हैं राधिका गुप्ता, कभी हालातों से तंग आकर आत्महत्या का आया था विचार

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Thu, 23 Jun 2022 03:56 PM IST
सीईओ राधिका गुप्ता
सीईओ राधिका गुप्ता - फोटो : instagram/officialhumansofbombay/
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महिलाएं आज प्रशासनिक सेवा से लेकर उद्योग जगत तक में अपना परचम लहरा रही हैं। आईएएस-पीसीएस बनने के लिए अगर यूपीएससी की कड़ी तैयारी और कठिन परीक्षा पास करके सफलता हासिल कर रही हैं तो वहीं कई कठिन पड़ावों और जीवन के संघर्षों से लड़ते हुए व्यवसाय व उद्योग को अपनी मेहनत से बुलंदियों तक पहुंचा रही हैं। भारत की ऐसी ही उद्यमी महिलाओं में कोई ठेला चलाकर आज करोड़ों के फूड चेन रेस्तरां की मालकिन बन गई है तो कोई बड़ी कंपनी के सीईओ पद पर रहते हुए कई लोगों की नौकरी का जरिया बनी हैं। ऐसी ही एक महिला उद्यमी राधिका गुप्ता है। राधिका गुप्ता की कहानी कठिनाइयों के सामने हार न मानने की प्रेरणा देती है। जीवन में कई लोग ऐसे मिल सकते हैं जो आपका, आपकी कमियों और अपने हुनर का मजाक बनाएं लेकिन आपकी मेहनत ही उनके हर मजाक या आलोचनाओं का जवाब बन सकती है। राधिका गुप्ता ने भी ऐसा ही कुछ कर दिखाया है, जिससे उनका मजाक बनाने वाले आज उनसे प्रेरणा लेते हैं। चलिए जानते हैं सबसे युवा महिला सीईओ राधिका गुप्ता की सफलता की कहानी।



कौन हैं राधिका गुप्ता

राधिका गुप्ता एडलवाइज ग्लोबल एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ हैं। राधिका भारत की सबसे युवा सीईओ में भी शुमार हैं। महज 33 साल की उम्र में उन्होंने ये उपलब्धि अपना नाम की। इतनी उम्र में राधिका ने सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचकर हर किसी के लिए उदाहरण पेश किया। लेकिन सफलता की यह राह आसान नहीं थी। राधिका को अपने जीवन में काफी संघर्ष करना पड़ा।  


राधिका गुप्ता का जीवन संघर्ष

दरअसल राधिका गुप्ता शारीरिक परेशानियों से पीड़ित थीं। बचपन में उन्हें टेढ़ी गर्दन और भाषा के कारण स्कूल में मजाक का सामना करना पड़ता था। उन्होंने खुद एक सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए अपनी आपबीती बताई। राधिका के पिता राजनयिक थे। इसकी वजह से राधिका की शिक्षा भारत, पाकिस्तान, अमेरिका और नाइजीरिया में हुई। यहां स्कूल में पढ़ाई के दौरान उनकी भाषा में भारतीय लहजा होने के कारण सहपाठी मजाक उड़ाते थे, तो वहीं टेढ़ी गर्दन की वजह से भी काफी सुनना पड़ता था।  

नौकरी न मिलने से तनावग्रस्त हो गईं राधिका 

राधिका की मां भी उसी स्कूल में पढ़ाती थीं, जहां राधिका पढ़ती थीं। ऐसे में सब राधिका की तुलना उनकी मां से किया करते थे। उनसे कहा जाता कि वह अपनी मां की तुलना में कुरूप हैं। इससे राधिका का आत्मविश्वास टूटने लगा। उसके बाद जब वह नौकरी की तलाश में जॉब इंटरव्यू दे रही थीं तो वह लगातार 7 इंटरव्यू में असफल रहीं। यहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। इन सभी कठिनाईयों से राधिका कमजोर पड़ने लगीं और आत्महत्या करने की सोची।

एक इंटरव्यू में राधिका ने बताया कि वह अपनी खिड़की से बाहर छलांग लगाने ही वाली थीं कि उनके दोस्तों ने उन्हें रोक लिया। उनकी तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए मनोचिकित्सक के पास ले गए। यहां उनका डिप्रेशन का इलाज हुआ। इलाज के बाद वह नौकरी के लिए फिर से इंटरव्यू देने गईं और इस बार उन्हें मैकेंजी में नौकरी मिल गई।

33 साल में बनी कंपनी की सीईओ

उनके जीवन में बदलाव आना शुरू हुआ। तीन साल बाद जब वह 25 साल की थीं, तो स्वदेश लौट आईं और पति व दोस्त के साथ मिलकर एसेट मैनेजमेंट फर्म की शुरुआत की। इसे बाद में एडलवाइस एमएफ ने अधिग्रहित कर लिया। बाद में राधिका ने एडलवाइज में सीईओ पद के लिए अप्लाई किया और महज 6 महीनों में उन्हें एडलवाइज का सीईओ चुन लिया गया। 
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