पायलट की राजस्थान कैबिनेट से बर्खास्तगी के पीछे उनकी ये तीन मांगें रहीं वजह

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Updated Tue, 14 Jul 2020 06:13 PM IST
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सचिन पायलट (फाइल फोटो)
सचिन पायलट (फाइल फोटो) - फोटो : ट्विटर

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राहुल गांधी की ओर से सोमवार को यह कहने से लेकर कि सचिन पायलट हमेशा उनके दिल में हैं और पार्टी के कई नेताओं द्वारा तमाम अनुरोधों के बीच मंगलवार को राजस्थान के उप मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को दोनों पदों से हटा दिया गया। 24 घंटे के अंदर हुए इस  घटनाक्रम को लेकर राजस्थान कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि पायलट ने पार्टी नेतृत्व के  सामने तीन शर्तें रखी थीं लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया जा सकता था। 
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मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, पायलट की इन तीन शर्तों या मांगों में पहली मांग यह थी कि कांग्रेस साल 2022 में होने वाले अगले राज्य विधानसभा चुनावों से एक साल पहले पार्टी सचिन पायलट को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की घोषणा करे। खबरों के मुताबिक, सचिन पायलट एक सार्वजनिक आश्वासन चाहते थे कि अगले साल उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस का चेहरा बनाया जाएगा।  
पायलट की दूसरी मांग यह थी कि उनका समर्थन करने वाले सभी लोगों जैसे कि पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह और बाकी विधायकों को समायोजित किया जाए। इसका मतलब यह नहीं था कि पायलट कह रहे थे कि सभी को मंत्री बना दिया जाए, लेकिन वह सभी को 'पुरस्कार' देने की मांग कर रहे थे। उदाहरण के दौर पर उन्हें किसी कॉरपोरेशन का अध्यक्ष नियुक्त करने या किसी अन्य निकाय की जिम्मेदारी देने की मांग की थी। 

कांग्रेस नेतृत्व के सामने रखी गई पायलट की तीसरी शर्त यह थी की कांग्रेस महासचिव और राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी अविनाश पांडे को उनके पद से हटा दिया जाए। पायलट का मानना है कि पांडे का गहलोत की ओर झुकाव ज्यादा है। ऐसे में पायलट का मानना था कि स्थिति तभी सामान्य हो सकती है जब पांडे के स्थान पर कोई अन्य व्यक्ति लाया जाए। बता दें कि राजस्थान में राजनीतिक संकट शुरू होते ही पांडे को आनन-फानन में जयपुर पहुंचने का निर्देश दिया गया था।

एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, 'हम उनकी ये शर्तें स्वीकार नहीं कर सकते थे क्योंकि ये एक तरह से ब्लैकमेल था। अगर बाकी राज्यों में भी इसी तरह होने लगा तो?' हालांकि, सचिन पायलट की ओर से इस पर अभी कोई बयान नहीं आया है लेकिन उनकी टीम के एक सदस्य ने कहा, 'कांग्रेस बाकी राज्यों में सत्ता में नहीं है। फिर उसे किस बात का डर है?' कुल मिलाकर पायलट के कैबिनेट से बाहर होने से गहलोत ने साफ इशारा कर दिया है कि राज्य में उनकी क्या स्थिति है।
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