Rajasthan Crisis: 14 अगस्त से शुरू होगा विधानसभा सत्र, राज्यपाल ने दी मंजूरी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Updated Wed, 29 Jul 2020 10:46 PM IST
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राज्यपाल कलराज मिश्र के साथ अशोक गहलोत (फाइल फोटो)
राज्यपाल कलराज मिश्र के साथ अशोक गहलोत (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

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राजस्थान में इन दिनों सियासी उठापटक जारी है और कोर्ट के जरिए राजनीतिक लड़ाई लड़ी जा रही है। इसी बीच विधानसभा सत्र शुरू करने की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मांग पर राज्यपाल ने फैसला ले लिया है और 14 अगस्त से विधानसभा सत्र शुरू करने की अनुमति दे दी है। इससे पहले गहलोत कैबिनेट ने भी विधानसभा सत्र को 14 अगस्त से बुलाने के लिए संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। 
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बसपा ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
बहुजन समज पार्टी (बसपा) ने राजस्थान उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इसके अलावा सचिन पायलट खेमे के एक और विधायक ने भी राजस्थान उच्च न्यायालय में तीन याचिकाएं दायर की हैं। ये याचिकाएं कांग्रेस पार्टी द्वारा निलंबित विधायक भंवरलाल शर्मा ने बुधवार को उच्च न्यायालय में एसओजी की तरफ से दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल की है।
विधानसभा अध्यक्ष ने दायर की विशेष अवकाश याचिका
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने सुप्रीम कोर्ट में ताजा विशेष अवकाश याचिका दायर की। यह याचिका राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा सचिन पायलट और 18 अन्य विधायकों के खिलाफ स्पीकर को कार्रवाई नहीं करने के निर्देश को लेकर दायर की गई है।

यह लड़ाई हम जीतेंगे : अशोक गहलोत
गहलोत ने राज्य में जारी राजनीतिक गतिरोध की ओर संकेत करते हुए कहा कि यह लड़ाई हम जीतेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार स्थायी व मजबूत है। वह कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय में पार्टी के नए प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा पदभार ग्रहण करने के अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे।

गहलोत ने कहा, ‘केंद्र सरकार के सहयोग से, भाजपा के षडयंत्र से, धनबल के प्रयोग से राज्य की कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने का षड्यंत्र चल रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘यह जो माहौल बना है, उससे चिंता करने की जरूरत नहीं है। हमारी सरकार स्थायी और मजबूत है।’

राजभवन में राज्यपाल से मिले गहलोत
अशोक गहलोत ने राज्यपाल कलराज मिश्र से राजभवन में बुधवार को मुलाकात की।

राज्यपाल ने तीसरी बार लौटाई सत्र बुलाने वाली फाइल
राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधानसभा बुलाने का राज्य सरकार का प्रस्ताव तीसरी बार लौटा दिया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि वे राज्यपाल से मिलेंगे और जानेंगे कि वह क्या चाहते हैं। गहलोत ने कहा, 'विधानसभा सत्र बुलाने का नोटिस 21 दिन का हो या 31 दिन का, जीत हमारी ही होगी।'

यह भी पढ़ें- कर्नाटक: एचडी कुमारस्वामी बोले- कांग्रेस 'हॉर्स ट्रेडिंग' का दूसरा नाम है

मायावती बोलीं- हम इस मुद्दे को जाने नहीं देंगे
राजस्थान में बसपा के छह विधायक- विधायक लखन सिंह (करौली), राजेन्द्र सिंह गुढ़ा (उदयपुरवाटी), दीपचंद खेड़िया (किशनगढ़ बास), जोगेंदर सिंह अवाना (नदबई), संदीप कुमार (तिजारा) और वाजिब अली (नगर, भरतपुर) कांग्रेस में शामिल हो गए थे। बसपा कई बार इस विलय के खिलाफ विरोध जता चुकी है। वहीं पार्टी सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को कहा था कि बसपा पहले भी अदालत जा सकती थी लेकिन हम अशोक गहलोत और कांग्रेस को सबक सिखाने के लिए सही समय का इंतजार कर रहे थे। अब हमने इस मामले पर अदालत का रुख करने का फैसला लिया है। हम इस मुद्दे को जाने नहीं देंगे। हम इसे उच्चतम न्यायालय तक लेकर जाएंगे।

ये सभी विधायक सितंबर 2019 में बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह बाबा ने कहा, 'हमने बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय के खिलाफ उच्च न्यायालय में आज रिट याचिका दाखिल की है।' बसपा विधायकों के सत्तारूढ़ कांग्रेस में विलय से प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार को मजबूती मिली थी और 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस की सदस्य संख्या बढ़कर 107 हो गई थी।
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बागी विधायक ने राजस्थान उच्च न्यायालय में दाखिल की याचिकाएं

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