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राजस्थान चुनाव: 36 साल रहे पाकिस्तान की जेल में बंद, 38 साल बाद डालेंगे वोट

चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 07 Dec 2018 12:23 AM IST
पत्नी के साथ गजानंद शर्मा
पत्नी के साथ गजानंद शर्मा
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अपने जीवन का आधा समय पाकिस्तान की जेल में गुजारने के बाद गजानंद शर्मा इस बार भारत में लोकतंत्र के पर्व में हिस्सा ले रहे हैं। जयपुर में माउंट रोड के स्थित फतेहराम टीबा के रहने वाले गजानंद शर्मा 7 दिसंबर को अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। गजानंद 38 साल बाद पाकिस्तान से भारत लौटे थे। यहां आते ही उन्होंने सबसे पहले अपना आधार कार्ड बनवाया। उन्होंने निर्वाचन आयोग से अपना वोटर कार्ड बनाने की अपील दर्ज करवाई जिसके बाद सोमवार को राजस्थान चुनाव आयोग ने गजानंद को उनका वोटर कार्ड दे दिया। उन्होने आखिरी बार 1980 में ब्यावर में मतदान किया था। मतदान के मद्देनजर निर्वाचन आयोग ने कुछ लोगों को वोटर आई-कार्ड जारी किए थे।

कोट लखपत जेल में थे बंद 

68 साल के गजानंद पिछले 36 साल से पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में बंद थे। उन्हें सिर्फ दो माह की सजा हुई थी लेकिन काउंसलर एक्सेस नहीं होने के कारण वह 36 साल जेल में बंद रहे। लाहौर जेल से गजानंद शर्मा की रिहाई 14 अगस्त को हुई। गजानंद वाघा बार्डर के रास्ते पाकिस्तान से भारत वापस आए थे। हालांकि गजानंद किन परिस्थितियों में भारत की सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गए थे यह साफ नहीं हुआ है। पाकिस्तान पहुंचने ही स्थानीय पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। बहरहाल, पाकिस्तान ने अपने स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पहले सद्भावना दिखाते हुए 30 भारतीयों को आज जेल से रिहा किया था जिनमें गजानंद भी शामिल थे। 

1982 में हुए थे अचानक लापता

साल 1982 में गजानंद अपने परिवार के साथ अमृतसर के महारकलां गांव में रहते थे।  एक रात अचानक वह गायब हो गए। लंबे समय तक उनका कुछ पता नहीं चला जिसके बाद  परिवार ने उन्हें मरा हुआ मान लिया था। इसके बाद गजानंद के परिवार अमृतसर छोड़कर जयपुर आ गया। उनकी पत्नी मखनी देवी बीते 36 सालों से विधवा की जिंदगी गुजार रही थीं। इसी साल 7 मई को सामेदा थाना पुलिस मखनी देवी के घर पहुंची और गजानंद के बारे में पूछताछ की। तब खुलासा हुआ कि गजानंद पाकिस्तान की लाहौर सेंट्रल जेल में बंद हैं। 

अब मेरी जिंदगी पत्नी के नाम 

38 साल के बाद अपने मताधिकार का प्रयोग करने को लेकर वह बेहद उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि मतदान को लेकर मैं बहुत उत्साहित हूं और 7 दिसंबर को मतदान जरूर करुंगा। उनका कहना है कि मैं अपना वोट उसे दूंगा जिसे मेरी पत्नी कहेगी। गजानंद कहते हैं, मुझे याद है कि जब मैंने अपना वोट आखिरी बार डाला था। उस समय एक कागज पर सभी प्रत्याशियों के नाम और चुनाव चिन्ह छपे होते थे। लोग अपने पसंदीदा प्रत्याशी के चुनाव चिन्ह पर मोहर लगाकर उस कागज को एक बक्से में डाल देते थे। 
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