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भाजपा में शामिल हुए किरोड़ी सिंह बैंसला, पार्ट टाइम आंदोलन से फुल टाइम राजनीति तक

चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 10 Apr 2019 03:25 PM IST
किरोड़ी सिंह बैंसला भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ
किरोड़ी सिंह बैंसला भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ - फोटो : PTI
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राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला अपने बेटे विजय बैंसला के साथ भाजपा में शामिल हो गए। किरोड़ी सिंह बैंसला ने गुर्जर आंदोलन से राजस्थान की पूर्व मुख्यमत्री वंसुधरा राजे की नाक में दम कर दिया था। राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद बैंसला ने अशोक गहलोत की सरकार के खिलाफ भी गुर्जर आरक्षण की मांगों को लेकर मोर्चा खोल था।
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इस अवसर पर किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा कि वह गुर्जर आरक्षण आंदोलन से पिछले 14 साल से जुड़े हुए हैं और इस दौरान उन्होंने दोनों दलों :कांग्रेस, भाजपा: के मुख्यमंत्रियों को नजदीक से अनुभव किया है और दोनों दलों की कार्यशैली, विचारधारा देखी। उन्होंने कहा कि वह भाजपा में इसलिए शामिल हो रहे हैं क्योंकि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित हैं, जो साधारण से साधारण आदमी का सुख-दुख समझते हैं। बैंसला ने कहा कि उन्हें पद का लालच नहीं है और वह चाहते हैं कि न्याय से वंचित लोगों को उनका हक मिले । 

 

कौन हैं बैंसला?

राजस्थान के करौली जिले के मुंडिया गांव में जन्मे कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला गुर्जर समुदाय से आते हैं। करियर के शुरुआती दिनों में बैंसला ने कुछ दिनों तक शिक्षक की भूमिका भी निभाई। चूंकि उनके पिता फौज में थे, तो उनका भी झुकाव फौज की तरफ हुआ और वो सिपाही के रुप में सेना में भर्ती हो गए। सेना की राजपूताना राइफल्स में शामिल हुए किरोड़ी सिंह, 1962 के भारत-चीन और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश के लिए लड़े।  

सेना से रिटायर होने के बाद कर्नल बैंसला ने राजस्थान में अपने गुर्जर समुदाय के लिए संघर्ष शुरु किया। सरकारों से अपनी मांगो को मनवाने के लिए आंदोलन किया। कई बार आंदोलन के दौरान रेेल रोकी, धरने पर बैठे और सरकारों को अपनी मांगो को मनवाने के लिए मजबूर किया। गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को भड़काने का भी आरोप उन पर लगा लेकिन वो अपने आंदोलन को धार देते गए और लोगों को शामिल करते गए। अब वो पूर्णकालिक राजनीति का हिस्सा हो गए हैं। साथ ही, राजस्थान में भाजपा के लिए बड़ा हथियार साबित हो सकते हैं। 

इससे पहले भाजपा जाट नेता हनुमान बेनीवाल को भी अपने पाले में खींच चुकी है। चुनाव से पहले जाट और गुर्जर समुदायों में पार्टी को इसका फायदा मिल सकता है।

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