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Rajasthan: प्रदेश में गहराएगा बिजली संकट, पांच विद्युत निगमों के JEN ने जयुपर में डाला महापड़ाव 

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Tue, 14 Jun 2022 11:05 PM IST
सार

पांच विद्युत निगमों के कनिष्ठ अभियंताओं ने जयपुर में महापड़ाव डाल दिया है। इस अनिश्चितकालीन महापड़ाव से प्रदेश में बिजली सप्लाई को लेकर नया संकट खड़ा हो गया है।

जयपुर के जगतपुरा में कनिष्ठ अभियंताओं ने महापड़ाव शुरू किया है।
जयपुर के जगतपुरा में कनिष्ठ अभियंताओं ने महापड़ाव शुरू किया है। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

राजस्थान के लोगों को बिजली सप्लाई और डिस्ट्रिब्यूशन को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि प्रदेश के पांच विद्युत निगमों के कनिष्ठ अभियंताओं ने सामूहिक कार्य बहिष्कार कर दिया है। जयपुर के जगतपुरा में कनिष्ठ अभियंताओं ने महापड़ाव डाल दिया है। यह अनिश्चितकालीन महापड़ाव पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के नेतृत्व में किया जा रहा है। 



बतादें कि कनिष्ठ अभियंता मांगों को लेकर 26 मई से काली पट्टी बांधकर काम कर रहे थे, लेकिन सुनवाई नहीं होने के बाद इन्होंने सामूहिक हड़ताल करने का निर्णय लिया। जयपुर, जोधपुर और अजमेर विद्युत वितरण निगमों, राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम और राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम के जेईएन सामूहिक हड़ताल पर गए हैं। इससे प्रदेश में बिजली व्यवस्था चरमराने लगी है। बताया जा रहा है कि अभी से ही डिस्ट्रिब्यूशन और फाल्ट सुधार सहित अन्य समस्याएं सामने आने लगी हैं। 


यह हैं मुख्य मांगें

  • कनिष्ठ अभियंता की ग्रेड-पे 4800 हो।
  • चिकित्सकों की तरह सभी विद्युत इंजीनियर्स को टाइम बाउंड प्रमोशन (6, 12 और 18 वर्ष) का लाभ मिले।
  • कनिष्ठ अभियंता को सलेक्शन स्केल लेवल-14 यानी, ग्रेड-पे 5400 का लाभ मिले।
  • बिजली कंपनियों की 185वीं कॉर्डिनेशन कमेटी की रिपोर्ट लागू हो।
  • राज्य सरकार आगामी मानसून सत्र में इंजीनियर्स सेफ्टी बिल पास करे। 


एसोसिएशन के अध्यक्ष ने सीएम को भेजा ज्ञापन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष हेमंत कुमार ने मुख्यमंत्री को मांगों को लेकर एक ज्ञापन भी भेजा है। जिसमें उन्होंने कहा, 3 मार्च 2022 को जयपुर में एक दिन के धरने के बाद एसीएस उर्जा ने वेतन विसंगति को जल्द सही करवाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद भी अब तक आदेश जारी नहीं किए। 25 मई को उर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी के नाम भी ज्ञापन दिया गया, उस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया है। इस कारण हमें मजबूरी में सामूहिक कार्य बहिष्कार का रास्ता अपनाना पड़ा। 

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