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राजस्थानः पूर्व सीएम को बंगला व आजीवन कैबिनेट का दर्जा देने वाला बिल खटाई में

ब्यूरो, अमर उजाला, जयपुर Updated Tue, 08 May 2018 09:14 PM IST
Rajasthan High Court
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 सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने बंगलों में पूर्व मुख्यमंत्रियों के काबिज रहने को गलत मानने के बाद अब राजस्थान में लागू पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला देने और आजीवन कैबिनेट का दर्जा देने वाला कानून अब खटाई में पड़ सकता है। राजस्थान हाईकोर्ट में इस बिल के खिलाफ याचिका पर 28 मई को सुनवाई होनी है। अब सबकी नजरें इस सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
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राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार विधानसभा में पिछले साल अप्रैल में पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला देने और आजीवन कैबिनेट का दर्जा देने वाला बिल लाई थी, जिसे पारित कर दिया गया था। विधानसभा में इस बिल का विरोध भाजपा के ही वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने किया। तिवाड़ी अब तक राजे पर इस कानून के जरिए 2000 करोड़ रुपये के वर्तमान निवास पर आजीवन कब्जा करने का आरोप लगा रहे हैं। 
इधर, राजस्थान हाईकोर्ट में पिछले साल ही इस कानून के विरोध में याचिका दायर की गई, जिसके संबंध में सरकार से जवाब-तलब भी किया गया था। राजस्थान सरकार ने अपने जवाब में कहा था कि उत्तर प्रदेश के इसी तरह के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, उसका फैसला आने के बाद जवाब दे दिया जाएगा। अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है और राजस्थान हाईकोर्ट में अगली सुनवाई की तारीख 28 मई है। राजस्थान सरकार अगली सुनवाई में अपना क्या पक्ष रखेगी, सभी की नजरें टिकी हुई हैं। 

गहलोत व इनके बंगलों पर ही खड़ा हो सकता है संकट
राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया ही अब तक सरकारी आवास में रह रहे हैं। उनके ये आवास खाली करवाया जा सकता है। वहीं, पूर्व उप राष्ट्रपति रहे भैरोंसिंह शेखावत के जयपुर के सरकारी बंगले में उनके दामाद विधायक नरपत सिंह राजवी रह रहे हैं। साथ ही राजस्थान के दो बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत भी बतौर विधायक एक सरकारी बंगले में रह रहे हैं। आम तौर पर विधायकों को इतना बड़ा बंगला नहीं दिया जाता, जितना कि नरपत सिंह राजवी और अशोक गहलोत को मिला हुआ है। इनके बंगलों पर भी संकट खड़ा हो सकता है।

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