राजस्थान के आठ शहरों में रात्रिकालीन कर्फ्यू, मास्क नहीं लगाने पर अब 500 रुपये जुर्माना

पीटीआई, जयपुर Updated Sun, 22 Nov 2020 01:04 AM IST
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रात में कर्फ्यू लगने के बाद शहर में पसरा सन्नाटा
रात में कर्फ्यू लगने के बाद शहर में पसरा सन्नाटा - फोटो : अमर उजाला

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राजस्थान सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण के मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित आठ जिला मुख्यालयों में रात्रिकालीन कर्फ्यू लगाने का फैसला किया है। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर मास्क नहीं पहनने पर जुर्माना बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है। वहीं राजधानी जयपुर में धारा 144 लगाई गयी है।
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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में शनिवार रात को राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में ये फैसले किए गए। बैठक में सर्दी और त्योहारी सीजन के कारण संक्रमण के बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने के उपायों पर विचार हुआ।
बैठक में यह निर्णय किया गया कि संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित आठ जिला मुख्यालयों (जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर, अलवर व भीलवाड़ा) के नगरीय क्षेत्र में बाजार, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल व अन्य वाणिज्यिक संस्थान शाम सात बजे तक ही खुले रहेंगे। इन आठ जिला मुख्यालयों के नगरीय क्षेत्र में रात आठ बजे से सुबह छह बजे तक रात्रिकालीन कर्फ्यू रहेगा। वहीं मास्क नहीं पहनने पर लगाया जाने वाला जुर्माना 200 रुपये से बढ़ाकर अब 500 रुपये कर दिया गया है।

हालांकि इस दौरान विवाह समारोह में जाने वाले, दवाइयों सहित अति आवश्यक सेवाओं से संबंधित लोगों तथा बस, ट्रेन व हवाई जहाज में सफर करने वालों को आवागमन की छूट होगी।

संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित आठ जिलों (जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर, अलवर एवं भीलवाड़ा) में जिला मुख्यालय स्थित नगरीय क्षेत्र में ऐसे राजकीय व निजी कार्यालयों एवं संस्थान जहां 100 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं वहां कार्य दिवसों में कार्मिकों की उपस्थिति 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। इन संस्थानों एवं कार्यालयों में स्टाफ को रोटेशन के आधार पर बुलाया जाएगा ताकि किसी भी कार्य दिवस पर 75 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी कार्यालय में उपस्थित नहीं हों।

एक सरकारी बयान के अनुसार बैठक में तय किया गया कि राज्य में संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में पूरे प्रदेश में विवाह समारोह सहित राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक इत्यादि आयोजनों में शामिल होने वाले लोगों की संख्या अधिकतम 100 होगी।

इसी तरह बैठक में निजी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े कुछ अस्पतालों को जरूरत पड़ने पर कोविड निर्दिष्ट अस्पताल बनाने के लिए अधिग्रहित करने हेतु सैद्धान्तिक सहमति दी गई। इसकी विस्तृत प्रक्रिया तय करने व कार्रवाई के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग को अधिकृत किया गया है। मेडिकल कॉलेज तृतीय वर्ष व चतुर्थ वर्ष के मेडिकल छात्रों की कक्षाएं शुरू कर सकेंगे। इन मेडिकल छात्रों को कोविड-19 के लिए ड्यूटी पर भी लगाया जा सकेगा।

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