रेलवे की बड़ी लापरवाही: ऊधमपुर-प्रयागराज स्पेशल ट्रेन में कोच लगाना भूले कर्मचारी, पठानकोट में यात्रियों ने किया हंगामा

संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Mon, 22 Nov 2021 10:07 AM IST

सार

रेलवे कर्मचारी ऊधमपुर-प्रयागराज स्पेशल ट्रेन में कोच जोड़ना ही भूल गए। इसका खामियाजा 72 यात्रियों को उठाना पड़ा। दरअसल, इन यात्रियों की इसी कोच में टिकट आरक्षित थी। यात्रियों ने पठानकोट कैंट रेलवे स्टेशन पर हंगामा किया और स्टेशन मास्टर को लिखित शिकायत दी। 
नारेबाजी करते यात्री।
नारेबाजी करते यात्री। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

ऊधमपुर में रेलवे की एक बड़ी लापरवाही सामने आई। ऊधमपुर से प्रयागराज जाने वाली ट्रेन में कर्मचारी एक कोच लगाना ही भूल गए। इसके चलते 72 यात्रियों को फर्श पर बैठ कर सफर करना पड़ा। वहीं पठानकोट कैंट पर विवाद बढ़ने के बाद ट्रेन दो घंटे देरी से रवाना हो सकी। इस दौरान यात्रियों ने काफी हंगामा किया। इसके बाद रेल अधिकारियों ने जालंधर कैंट में एक अतिरिक्त कोच लगाने का आश्वासन दिया तो ट्रेन शनिवार शाम 6:40 के बजाय रात 8:40 पर रवाना हो सकी।
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दरअसल, ऊधमपुर से प्रयागराज जाने वाली 04142 स्पेशल ट्रेन अपने निर्धारित समय पर ऊधमपुर से रवाना हुई। इस दौरान रेल अधिकारियों ने गलती से एसई-1 कोच ट्रेन के साथ नहीं जोड़ा। इसमें 72 लोगों ने टिकट आरक्षित करवाई थी। जब ट्रेन जम्मूतवी पहुंची और यात्रियों ने अपना कोच तलाशा तो वह नहीं मिला। 10-15 मिनट की देरी पर आनन-फानन में यात्रियों को अन्य कोचों में बैठाया गया।


ट्रेन पठानकोट कैंट पहुंची तो यात्रियों की संख्या बढ़ गई। इससे अन्य कोचों में यात्रियों को बैठाना मुश्किल हो गया। इसके बाद यात्रियों ने हंगामा कर दिया। डेढ़ घंटा यात्री रेल अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। यात्रियों ने स्टेशन मास्टर को लिखित शिकायत दी। इसके बाद ट्रैफिक इंस्पेक्टर राकेश कुमार ने फिरोजपुर में डिवीजनल अधिकारियों से बात की। 

अधिकारियों ने जालंधर कैंट में एक कोच जोड़ने का आश्वासन दिया। इसके बाद यात्रियों को समझाकर ट्रेन में बैठाया गया और ट्रेन दो घंटे बाद पठानकोट कैंट से रवाना हुई। उत्तर प्रदेश के कन्नौज निवासी राकेश ने बताया कि वह सात लोग हैं। एसई-1 कोच में टिकट कंफर्म थी लेकिन ट्रेन में वह कोच नहीं था। इसके कारण उनके पूरे परिवार को फर्श पर बैठकर जम्मू से पठानकोट तक का रास्ता तय करना पड़ा। राकेश ने बताया कि उसके साथ तीन परिवार और थे जो अलग-अलग कोच में बैठे। रेलवे को जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

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