भगवान की कृपा और प्रशंसकों की दुआओं से मिला पुरस्कारः : निर्मल ऋषि

Patiala Updated Wed, 26 Dec 2012 05:30 AM IST
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पटियाला। पंजाबी थिएटर मेरा जुनून है और यही दिली इच्छा है कि आखिरी सांस तक पंजाबी थिएटर के लिए अच्छा काम करती रहूं, लेकिन पंजाबी थिएटर को प्रमोट करने की जरूरत है। यह कहना है लुधियाना की जानी-मानी पंजाबी थियेटर और फिल्म कलाकार निर्मल ऋषि का। संगीत नाटक अकादमी से पंजाबी रंगमंच में योगदान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने की घोषणा पर निर्मल ऋषि ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि भगवान की कृपा और प्रशंसकों की दुआओं से इतना प्रतिष्ठित पुरस्कार उन्हें मिलने जा रहा है। वह बहुत खुशी महसूस कर रही हैं, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। खुशी है कि किसी की सिफारिश के सहारे उन्हें यह अवार्ड नहीं मिला, बल्कि पंजाबी रंगमंच के लिए किए गए उनके काम को सराहा गया है।
मानसा में 1943 में जन्मी निर्मल ऋषि को स्कूल के दिनों से थिएटर का शौक था। स्कूल व कालेज में खेलों में अच्छा प्रदर्शन के चलते बाद में उन्होंने गेम इंस्ट्रक्टर बनना चुना और एमफिल डिग्री के लिए पटियाला के सरकारी फिजिकल एजूकेशन कालेज में दाखिला ले लिया।
इसी कालेज में उनकी ओर से पेश मोनो एक्टिंग को काफी पसंद किया गया। इसी दौरान प्रसिद्ध रंगकर्मी हरपाल टिवाना और उनकी पत्नी मीना टिवाणा ने निर्मल ऋषि के टैलेंट को पहचाना और उन्हें पंजाबी थिएटर में लाए। ऋषि ने 1966 में पहले नाटक अधूरे सपने में अभिनय किया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। निर्मल ऋषि ने कनक दी बाली, लोहा कुट, गुरु तेग बहादुर की शिक्षाओं पर आधारित नाटक हिंद दी चादर, दीवा बले सारी रात, चंडीगढ़ मुसीबत दा घर, गर्म बाजार और बहुरूपिया जैसे कई प्रसिद्ध नाटकों में काम किया। इसके अलावा कई यादगार पंजाबी फिल्में लौंग दा लिश्कारा, कुर्बानी जट दी, उचा दर बाबे नानक दा में भी काम किया।
अमर उजाला से बात करते हुए निर्मल ऋषि ने 1986 में प्रसिद्ध रंगकर्मी हरपाल टिवाना की ओर से निर्देशित पंजाबी फिल्म लौंग दा लिश्कारा को अपने कॅरियर के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि इस फिल्म में उनकी ओर से निभाए गुलाबो मासी के किरदार को वह अपना मास्टर पीस मानती हैं।
भविष्य की योजनाओं के बारे में उन्होंने कहा कि वह बालीवुड फिल्मों व मुंबई में बनने वाले टीवी सीरियलों में अच्छा काम करना चाहती हैं। आजकल बालीवुड फिल्मों व टीवी सीरियलों में पंजाबी कल्चर को काफी दिखाया जा रहा है, जो पंजाबी थिएटर के लिए और यहां के कलाकारों के लिए अच्छा संकेत है।

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