बहुराष्ट्रीय कंपनियां संस्कृति को भी बिगाड़ेगी

Patiala Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
राजपुरा। पूर्व विधायक कामरेड बलवंत सिंह ने कहा कि रिटेल में विदेशी निवेश की अनुमति के बाद बहुराष्ट्रीय कंपनियां यहां पूंजी निवेश तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि वे पश्चिम के बुरे संस्कारों को भी भारतीयों पर थोपेंगी। एफडीआई से देश के लघु उद्योग और छोटे दुकानदार तबाही के कगार पहुंच जाएंगे। बलवंत सिंह सोमवार को एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जिन-जिन देशों ने भी विदेशी पूंजी के बल पर विकास का रास्ता अपनाया है वहां कि संस्कृति विकृत हुई है। मनमोहन सरकार द्वारा ये कहा जाना कि एफडीआई के आने से विकास की दर बढे़गी, रोजगार बढे़गा और किसानों को फायदा पहुंचेगा यह सरासर गलत है।
एफडीआई के आने से किसानों को और भी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। देश में पहले ही तीन लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं। देश में बेरोजगारी की दर लगातार बढ़ती जा रही है जो एफडीआई से और बढे़गी। बलवंत सिंह ने बताया कि भारत के 18 प्रतिशत हाउस होल्डर के पास अपना एक कमरा भी नही। वहीं ग्रामीण इलाकों की 23 प्रतिशत आबादी के पास भी कोई कमरा नहीं। 50 प्रतिशत गंावों में सैनीटेशन का प्रबंध नहीं। 68 प्रतिशत देश के लोग दूषित पानी पीते हैं। 50 प्रतिशत घरों में बिजली नहीं है और 60 प्रतिशत लोग आज भी लकड़ी से चूल्हे पर खाना बनाते हैं। ऐसे में सरकार को गरीब जनता की चिंता करनी चाहिए न की विदेश कंपनियाें की।

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