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इलाज के लिए प्राइवेट वर्कर परेशान

Patiala Updated Thu, 02 Aug 2012 12:00 PM IST
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राजपुरा। राजपुरा के इएसआई अस्पताल बंद होने से फैक्ट्रियों में काम करने वाले मुलाजिमों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें इलाज के लिए सिविल अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और दवाइयों के लिए जेब से पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। हालांकि यहां अस्पताल की जगह एक छोटी सी डिस्पेंसरी खोली गई है, लेकिन इस डिस्पेंसरी में भी आने वाले मरीजों को सिविल अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। दूसरी ओर बंद रहने की वजह से 50 बिस्तरों वाले इस इएसआई अस्पताल की हालत भी खस्ता होती जा रही है। अस्पताल में पड़ा सामान कबाड़ होता जा रहा है।
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गत पांच दशकों में राजपुरा में कई तरह की फैक्ट्रियां खोली गई थीं। इन फैक्ट्रियों में कई हजार मुलाजिम काम करते थे। जिन्हें सरकार की स्कीम के तहत सस्ती व बेहतर सेहत सुविधाएं पहुंचाने के लिए यहां ईएसआई अस्पताल का निर्माण किया गया और प्राइवेट मुलाजिमों को बेहतर सेहत सेवाएं उपलब्ध कराई गई थीं। तीन साल पहले अस्पताल बंद होने तक यहां प्राइवेट मुलाजिमों व उनके परिवारों का हर तरह का इलाज किया जाता था और जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल में दाखिल भी किया जाता था।
लेकिन पिछलें कुछ समय दौरान राजपुरा की कई फैक्ट्रियां बंद हो गईं। इसके कारण प्राइवेट फैक्ट्रियों के मुलाजिमाें की संख्या भी कम हो गई। संख्या कम होने के चलते 2009 में यह अस्पताल गोबिंदगढ़ शिफ्ट कर दिया । इतनी बड़ी बिल्डिंग में एक छोटी डिस्पेंसरी खोल दी गई। लेकिन डिस्पेंसरी प्राइवेट मुलाजिम को सेहत सेवाएं उपलब्ध कराने में नकामयाब रही और यहां आने वाले सभी मरीजों को सिविल अस्पताल रेफर किया जाने लगा।
लेकिन जो सहूलियतें प्राइवेट मुलाजिमों को इएसआई अस्पतालों में मिलती हैं वह सिविल अस्पताल में नहीं मिलतीं। जिससे प्राइवेट मुलाजिमों को अपनी दवा के लिए अपने वेतन में से ही पैसे निकालने पड़ रहे हैं।
10 हजार वर्कर ले रहे इएसआई का लाभ
जानकारी के अनुसार 10 हजार से ज्यादा वर्कर इएसआई स्कीम ले रहे है। लेकिन राजपुरा में इएसआई अस्पताल के बंद होने से यहां के प्राइवेट मुलाजिम काफी परेशान हैं। राजपुरा की एक बड़ी ईकाई में काम करने वाले यूनियन नेता अजय कुमार व प्रवीन कुमार ने बताया कि इएसआई अस्पताल बंद होने से बेचारे मुलाजिम इलाज के लिए दरबदर भटक रहे हैं। उनकी मांग है कि अस्पताल को फिर से शुरू किया जाए।
क्या कहती है ब्रंाच मैनेजर
इएसआई की ब्रांच मैनेजर चंद्रकला व डिस्पेंसरी प्रमुख निधि का कहना है कि इएसआई को डायग्नास्टिक सेंटर बनाया जा रहा है इसके लिये डाक्टरों सहित 40 कर्मचारियों का स्टाफ भी सेक्शन किया जा चुका है। अभी स्टाफ की कमी होने के चलते थोड़ी बहुत परेशानी आ रही है। रोजाना 120 से अधिक मरीज आते हैं और ज्यादातर का इलाज डिस्पेंसरी में किया जाता है।

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