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गोघा पीर पर्व पर महिलाओं ने की पूजा-अर्चना

Patiala Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
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राजपुरा। श्रावण माह के सोमवार को गोघा पीर पर्व मनाया गया। गोघा पर्व की बहावलपुर समाज में बहुत ही मान्यता है। भारत के साथ-साथ पाकिस्तान के मुल्तान व बहावलपुर में भी लाखों परिवार गोघा पर्व मनाते हैं। लोगों का मानना है कि श्रावण माह में नाग देवता पाताल छोड़ कर जमीन पर आ जाते हैं, उनसे सुरक्षा पाने के लिए ये पर्व नागाें के देवता गोघा पीर को प्रसन्न करने के लिए मनाया जाता है। बहावलपुर समाज में मान्यता है कि गोघा पीर अगर प्रसन्न हो जाते हैं तो सर्प उनका कोई नुकसान नहीं करती।
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गोघा पूजन के समय महिलाएं कीकर की झाड़ियाें की पूजा करती हैं। पूजन में सबसे पहले झाड़ी पर चीनी घुला हुआ दूध छिड़का जाता है। फिर हाथ से मैदे की बनी हुई मोटी सर्पाकार सेवाइयां और मैदे के बने हुए अखे डाले जाते हैं। फिर सूत का धागा झाड़ी पर बांधा जाता है, जिसे गोघा पीर का जनेऊ कहते हैं, वास्तव में ये रक्षा बंधन होता है। जिसे बांध कर महिलाएं गोघा पीर से हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हैं कि हम पर कृपा रखें। पूजन के बाद घर आकर महिलाएं घर में चीनी घुले हुए दूध के छीटें डालती हैं। रात को मैदे की बनी सेवाइयां पानी में उबालकर दूध व चीनी के साथ पूरे परिवार के साथ मिलकर खाते हैं। उस रात रोटी सब्जी या अन्य पदार्थ नही खाये जाते। ब्राह्मण समाज के प्रमुख चुरंजी शर्मा का कहना है कि अगर गोघा पीर पूजा से कोई परिवार वंचित रह जाएं तो सावन की संक्रांति के दो सप्ताह बाद पड़ने वाले रविवार को भी पूजा की जा सकती है।

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