मांगे तेरह करोड़, मिले मात्र सवा तीन करोड़

Patiala Updated Thu, 12 Jul 2012 12:00 PM IST
पटियाला। सरकार ने अब तक घग्गर दरिया के कमजोर पुलों और बांधों की मरम्मत नहीं कराई है। ड्रेनेज विभाग ने सरकार को प्रस्ताव भेजकर घग्गर दरिया के कमजोर बांधों व पुलों की मरम्मत के लिए पैसे मांगे थे। लेकिन सरकार ने पैसे नहीं दिए। जो थोड़ा-बहुत फंड मिला भी, वह ड्रेनों व नदियों की सफाई के लिए ही नाकाफी रहा। ऐसे में भारी बारिश होने की स्थिति में पटियाला जिले में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
ड्रेनेज विभाग ने सरकार को खास तौर से चंबो वाली चौ, पटियाला की बड़ी नदी, सरहंद चौ, मोहल गबारा ड्रेन, पटियाला की राओ ड्रेन, बनूड़ ड्रेन, सरायपति ड्रेन, नाभा ड्रेन, अदालती वाला ड्रेन, माडल टाउन ड्रेन व कुछ अन्य ड्रेनों से सिल्ट, सरकंडे और बूटी साफ करने के लिए साढ़े तीन करोड़ और अकेले घग्गर दरिया के लिए दस करोड़ रुपये मांगे थे। इस 10 करोड़ से घग्गर के कमजोर पुलों को मजबूत करने के काम के साथ-साथ इसके टूटे किनारों को ठीक करने का काम प्रमुख तौर पर शामिल था। लेकिन सरकार ने कुल सवा तीन करोड़ दिए। जिससे केवल ड्रेनों व पटियाला की बड़ी नदी की सफाई का काम कुछ हद तक हो पाया है और घग्गर दरिया में कोई काम नहीं हो सका। जबकि घग्गर दरिया में डेराबस्सी से लेकर खन्नौरी तक 150 किलोमीटर के एरिया में खास तौर से बादशाहपुर के नजदीक 30 किमी के एरिया में बांधों की हालत काफी खस्ता है। इसके साथ ही घग्गर दरिया के रसौली व माडू पुलों की हालत भी दयनीय है।
ऐसे में अगर भारी बारिश होती है, तो घग्गर दरिया के किनारे बसे करीब 70 गांव पूरी तरह से तबाह हो सकते हैं। यहां लगी फसलों का नुकसान होने का खतरा है। ड्रेनेज विभाग के एक्सईएन बीपीएस बराड़ ने कहा कि सरकार से भले ही राशि कम मिली है, लेकिन ड्रेनों व नदियों की सफाई करा दी है। जिससे लोगों को कोई दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने माना कि घग्गर दरिया के लिए बजट नहीं मिला। पिछले साल कुछ काम करा दिया गया था।

---बाढ़ को लेकर पटियाला में किए गए प्रबंध---
जिला प्रशासन की ओर से बड़ी नदी और डीसी दफ्तर में कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। बड़ी नदी पर बनाया कंट्रोल रूम बाढ़ की स्थिति पर नजर रखेगा और ऐसी स्थिति पैदा हो जाने पर तुरंत डीसी दफ्तर वाले कंट्रोल रूम को सूचित करेगा। साथ ही सभी एसडीएम और एडीसी को बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए किश्तियों, लाइव सेविंग जैकेटों, तंबुओं बगैरा का प्रबंध करने को भी कह दिया गया है। उधर सेहत विभाग की ओर से बाढ़ में गंदे पानी से होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में जरूरी दवाओं का स्टाक रखने को कहा गया है। पशुपालन विभाग को भी जानवरों के इलाज के लिए पर्याप्त दवाएं रखने को कहा गया है।

कई हेक्टेयर फसल हो सकती है तबाह
पटियाला। जिले में अगर बाढ़ आती है, तो काफी नुकसान हो सकता है। खास तौर से किसानों लाखों हैक्टेयर रकबे पर लगी धान की फसलें बर्बाद हो सकती है। वहीं निचले इलाकों में लोगों के घरों में पानी घुसने से संपत्ति का नुकसान होने के साथ-साथ जानी नुकसान भी हो सकता है। घग्गर दरिया के किनारे बसे सैकडों गांव तबाह हो सकते हैं। पटियाला जिले में साल 2010 में बाढ़ से काफी नुकसान हुआ था। लाखों हेक्टेयर रकबे पर लगी धान की फसलें बुरी तरह से तबाह हो गई थीं।

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