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आरएसडी की बसों पर वित्तीय संकट

Pathankot Updated Wed, 27 Mar 2013 05:33 AM IST
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शाहपुरकंडी (पठानकोट)। प्रदेश सरकार के वित्तीय संकट का असर अब रणजीत सागर बांध परियोजना (आरएसडी) शाहपुरकंडी की बस सेवा पर भी पड़ने लगा है। फंड के अभाव में एक अप्रैल से परियोजना के कर्मचारियों और बच्चों को स्कूल-कालेज छोड़ने जाने वाली सरकारी बसें बंद हो जाएंगी। इस बाबत परियोजना के मुख्य अभियंता ने बच्चों को स्कूल भेजने और नौकरी पर जाने के लिए मुलाजिमों को अपनी व्यवस्था स्वयं करने संबंधी पत्र जारी कर दिया है।
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पठानकोट और आसपास के इलाकों में पड़ते स्कूल कालेजों में बांध कर्मचारियों के बच्चों को छोड़ने के लिए रोजाना 20 बसें चलती थीं। बसें काफी पुरानी होकर खस्ताहाल हो चुकी है, लेकिन फंड के अभाव में बांध प्रशासन उन्हें भगा रहा है। वहीं लगातार सड़क हादसों में बच्चों की मौत के बाद उच्चतम न्यायालय के सख्त रुख के चलते दस साल की समय सीमा पूरी कर चुकी स्कूल व कॉलेजों की बसों पर पूरी पाबंदी लगाए जाने के बांध प्रशासन को सोचने पर मजबूर कर दिया है। लिहाजा फंड की कमी के चलते बांध प्रशासन ने उच्चतम न्यायालय के आदेशों का हवाला देकर एक अप्रैल से बसों को भेजने पर पाबंदी लगा दी है। इसके चलते परियोजना के मुलाजिमों को अपने बच्चों को स्कूल-कॉलेज भेजने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। परियोजना के अधिशाषी अभियंता आरएल मित्तल ने बताया कि पुरानी 37 करोड़ की अदायगी के चलते खजाना सील है। इसके चलते परियोजना के सभी लेन देन पिछले कई महीनों से बंद पड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि अब उच्चतम न्यायालय के आदेशों ने बसों को बंद करने पर मजबूर कर दिया है। मित्तल ने बताया कि बांध प्रशासन की ओर से सरकार को 30 नई बसें और फंड देने के लिए पत्र भी लिखा है। उधर, वर्कशाप मंडल परिवहन के अधिशाषी अभियंता एमएल सभ्रवाल ने कहा कि परियोजना की 20 बसें बच्चों को छोड़ने जाते हैं जिनकी हालत ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि बच्चों को छोड़ने के लिए सकारात्मक हल ढूंढने की कोशिश की जा रही है। दूसरी तरफ भारतीय मजदूर संघ के जिला महासचिव ओपी वर्मा का कहना है कि बसें बंद करके बांध प्रशासन मुलाजिमों के सामने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। उन्होंने कहा कि परियोजना से ज्यादातर बच्चे 20 किलोमीटर दूर पठानकोट पढ़ने जाते हैं और यहां पर सुबह उन्हें स्कूल छोड़ने के लिए कोई अन्य स्त्रोत भी नहीं है। लिहाजा उन्होंने हल्का विधायक व डिप्टी स्पीकर दिनेश सिंह बब्बू से मामले में हस्तक्षेप कर समस्या हल करने की मांग की है।
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