सिविल सर्जन की राह देख रहा अस्पताल

Pathankot Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
पठानकोट। पंजाब सरकार की ओर से पठानकोट को जिला बनाए एक साल से ज्यादा बीत चुका है, लेकिन अभी तक विभिन्न विभागों को पर्याप्त स्टाफ मुहैया नहीं कराया जा सका है। लोगों को अपने मेडिकल और अन्य प्रमाणपत्रों को बनवाने के लिए पहले पठानकोट और फिर बाद में गुरदासपुर जाकर धक्के खाने पड़ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार सेहत विभाग के नेशनल हेल्थ रुरल मिशन के तहत केंद्र सरकार से ग्रांट जारी की जा रही है और ग्रांट के लिए हर जिले का एक कोड निर्धारित किया गया है। पठानकोट को अभी तक कोड नहीं मिलने के कारण गुरदासपुर जिले के कोड पर ही ग्रांट जारी हो रही है। नए जिला को कोड मिलने में मार्च 2014 तक का इंतजार करना पड़ेगा और उसके बाद ही नए सिविल सर्जन की नियुक्ति की संभावना है। उधर, सिविल सर्जन की नियुक्ति न होने से लोग अपने प्रमाणपत्र बनाने के लिए भटक रहे हैं। खासकर तहसील धार कलां के गांव लहरुन, सारटी, दरबान, दरकुआ, फंगोता, पतरालवां और अन्य गांवों के ग्रामीण दस-दस किलोमीटर पैदल चलकर और उसके बाद 200 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। वे अपने काम केलिए सुबह चार बजे उठना पड़ता है और शाम को नौ बजे घर खाली हाथ वापिस पहुंचते हैं। बताया जाता है कि पठानकोट अस्पताल में अगस्त 2011 तक मेडिकल सार्टिफिकेट जारी कर करने के बाद इन पर रोक लगा दी गई है। अब उन्हें प्रमाणपत्र लेने गुरदासपुर जाना पड़ता है और वहां पर भी सप्ताह में एक दिन ही प्रमाणपत्र बनवाने के लिए निर्धारित किया गया है लिहाजा उनके पास केवल लाइनों में धक्के खाने के सिवाए कुछ नहीं बचा है।
दरअसल, गुरदासपुर का हिस्सा होने से पहले सिविल सर्जन ने दफ्तर में भीड़ कम करने के लिए पठानकोट अस्पताल की एसएमओ को र्स्टीफिकेट जारी करने की पावर दे दी थी, लेकिन अब नया जिला बनने पर दोबारा पावर वापिस ले ली हैं। इस संबंध में देहाती मजदूर सभा के लाल चंद कटारुचक्क, मास्टर सुभाष शर्मा, शिव कुमार ने कहा कि पठानकोट में सिविल सर्जन की नियुक्ति कर काम शुरु किया जाए। उन्होंने कहा कि सिविल सर्जन की नियुक्ति नहीं होने से जन्म, मृत्यु और विकलांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लोगों को धक्के खाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल प्रमाण पत्र भी नहीं बनने से नौकरी के लिए भर्ती होने वाले अभ्यर्थियों को भी भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पठानकोट में उपरोक्त प्रमाण पत्र बनवाने केसंबंध में उन्हें गुरदासपुर सिविल सर्जन दफ्तर भेज दिया जाता है जहां पर नए जिला पठानकोट में जाकर दस्तावेज बनवाने की बात करकेकर्मचारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ देते हैं। उन्होंने पंजाब सरकार से पठानकोट में सिविल सर्जन की स्थायी नियुक्ति कर कामकाज शुरू करने की मांग की है।
सिविल सर्जन दफ्तर के लिए सिविल अस्पताल की दूसरी मंजिल पर बनाए वार्डों को दफ्तर में बदलने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। लेकिन, उनकी अनुपस्थिति में लोगों को मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अभी भी गुरदासपुर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

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