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क्रशर लगाने को लेनी होगी खनन महकमे की मंजूरी

Pathankot Updated Wed, 29 Aug 2012 12:00 PM IST
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पठानकोट। एक तरफ जहां अवैध खनन पर सर्वोच्च न्यायालय का रवैया सख्त है। वहीं पर्यावरण को हो रहे नुकसान को देखकर अवैध खनन पर लगाम कसने और नई क्रशर इंडस्ट्री लगाने के लिए खनन विभाग से मंजूरी लेना जरूरी होगा और कच्चे माल के दोहन का क्षेत्र भी बताना होगा। । ऐसा सूबे में माफियाओं के हत्थे चढ़ चुके खड्डों में अवैध खनन को रोकने के लिए फैसला किया गया है।
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उल्लेखनीय है कि वर्ष 2006 के बाद राज्य में खनन एक उद्योग के रूप में सामने आया है और अब यह उद्योग माफियाओं के हत्थे चढ़ चुका गया है। वहीं पिछले पांच सालों में क्रशर इंडस्ट्री में बाढ़ सी आ गई। जहां वर्ष 2006 के बाद से पठानकोट और गुरदासपुर में 46 सौ एकड़ खनन क्षेत्र में आती 90 खड्डों में लगभग साढ़े 4 सौ क्रशर खुल चुके हैं जिनकी तादाद पहले डेढ़ सौ के आस पास थी। राज्य में धडल्ले से अवैध खनन होने से पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। इसलिए पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने खड्डों से खनन करने से पहले पर्यावरण क्लियरेंसी लेने के आदेश जारी किए हैं। अभी तक नई क्रशर इंडस्ट्री लगाने के लिए पर्यावरण विभाग की एनओसी लेनी होती थी। अब उन्हें खनन विभाग से मंजूरी लेनी पड़ेगी।
इस बारे में पूछने पर खनन विभाग पठानकोट के जीएम सुभाष चंद्र ने बताया कि पर्यावरण विभाग की एनओसी लेकर पहले कोई भी क्रशर इंडस्ट्री लग जाती थी और उसके लिए खनन विभाग से कोई एनओसी नहीं लेनी पड़ती थी इसी का लाभ उठाकर अवैध खनन चल रहा था। उन्होंने बताया कि नई नीति के तहत अब खनन महकमे की मंजूरी के बिना क्रशर इंडस्ट्री नहीं चल सकेगी। उन्होंने बताया कि नई क्रशर इंडस्ट्री के लिए प्रार्थी को पहले विभाग के पास आवेदन करना होगा और उसे अपनी इंडस्ट्री के लिए निर्धारित क्षेत्र के पांच किलोमीटर के भीतर कच्चे माल का आमद का ब्योरा भी देना होगा। ताकि जहां कहीं पर भी क्रशर इंडस्ट्री लगाकर अवैध को बढ़ावा मिल रहा था।
बाक्स
59 खड्डों की बोली अटकी
पठानकोट। पठानकोट और गुरदासपुर जिला में 46 सौ एकड़ खनन क्षेत्र में 90 खड्ड हैं। इनमें पांच हजार हेक्टेयर तक 31, 50 हेक्टेयर तक की 44 और 50 हेक्टेयर से ऊपर की 15 खड्डे हैं। अभी तक पांच हेक्टेयर तक की 31 खड्डों की बोली हो सकी है, लेकिन उससे ऊपर की खड्डों की बोली नहीं हो सकी है। वहीं पंजाब में रेत, बजरी और पत्थर की मांग बढ़ने के चलते रेट काफी बढ़ गए हैं। खनन विभाग के जीएम सुभाष चंद्र ने बताया कि पर्यावरण विभाग की क्लीयरेंस मिलने के बाद जल्द ही बाकी बची खड्डों की नीलामी भी करा दी जाएगी।

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