शराब फैक्टरी में धमाके से वेल्डर समेत दो झुलसे

Pathankot Updated Mon, 23 Jul 2012 12:00 PM IST
पठानकोट। इंडस्ट्रियल एरिया अखवाना स्थित शराब फैक्टरी में वेल्डिंग करते समय धमाका होने से वेल्डर समेत दो लोग झुलस गए। उन्हें पठानकोट के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत चिंताजनक बनी है। हादसा टैंकर के सिलेंसर को वेल्डिंग करते समय हुआ। हादसे के बाद फैक्टरी प्रबंधकों ने मामले पर चुप्पी साध ली है। घायलों की पहचान शहर के नेहरू नगर की गली निवासी वेल्डर सुनील कुमार पुत्र बिशन दास और गुरदासपुर के गांव बटवाला निवासी टैंकर चालक अजीत सिंह पुत्र हंसराज के रुप में हुई है।
घायल अजीत सिंह ने बताया कि लुधियाना से आज स्प्रिट का टैंकर लेकर आया था। टैंकर के सिलेंडर में लीकेज थी जिसे ठीक कराने के लिए उसने फैक्टरी के अफसरों को कहा, लेकिन उन्होंने फैक्टरी में ही उसकी वेल्डिंग करने का भरोसा देकर उसे रोके रखा। साढ़े तीन बजे वेल्डर सुनील कुमार सिलेंसर की वैल्डिंग कर रहा था। इसी दौरान टैंकर के डीजल टैंक में आग लगने से धमाका हो गया और सुनील समेत पास ही काम को देख रहे अजीत सिंह आग की चपेट में आ गए। धमाके की आवाज सुनकर अन्य मुलाजिम भी इकट्ठा हुए और आग की चपेट में आया सुनील बाहर की तरफ भाग गया जिसे मुलाजिमों ने बचाया। अजीत सिंह ने बताया कि फैक्टरी में कोई एंबुलेंस मौजूद तक नहीं थी जिसमें उन्हें ले जाया जाता। एक घंटा तक वह फैक्टरी में ही झुलसने से तड़पता रहा। दोनों को गंभीर हालत में सिविल अस्पताल पठानकोट में भर्ती कराया गया। जहां से दोनों की हालत गंभीर देख उन्हें रेफर कर दिया गया। दोनों को शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। डाक्टरों ने बताया कि सुनील के शरीर का 53 फीसदी और अजीत के शरीर का 43 फीसदी हिस्सा झुलस चुका है। इसके चलते उनकी हालत गंभीर बनी है। हादसे के बाद फैक्टरी प्रबंधन ने चुप्पी साध ली है और कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। मामले की जानकारी समाचार लिखे जाने तक पुलिस को नहीं दी गई थी।
इनसेट।
फैक्टरी में नहीं थी एंबुलेंस
पठानकोट। अखवाना स्थित शराब फैक्टरी में सैकड़ों मजदूर काम करते हैं, लेकिन मौके पर प्राथमिक उपचार और मेडिकल एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं थी लिहाजा एक घंटा तक दोनों घायल तड़पते रहे और बाद में उन्हें निजी वाहन से अस्पताल ले जाया जा सका। जबकि पहले भी फैक्टरी में ऐसे हादसे हो चुके हैं। सवाल उठाया जाता है कि फैक्टरी में श्रम कानून के तहत हर माह चेकिंग की जाती है और वहां पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और सुविधाओं की जांच की जाती है। इससे जांच करने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग गया है। घायल अजीत ने बताया कि हादसे के बाद इलाज के लिए अस्पताल ले जाने को फैक्टरी के अधिकारियों को गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन किसी ने कोई हामी नहीं भरी। एक घंटे के बाद फैक्टरी के एक अधिकारी ने अपनी गाड़ी से उसे अस्पताल पहुंचाया।

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