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रणजीत सागर डैम पर टूटा पांच साल का रिकार्ड

Pathankot Updated Fri, 06 Jul 2012 12:00 PM IST
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पठानकोट। मानसून में देरी का असर बांधों के जल स्तर पर भी पड़ रहा है। तीन राज्यों पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की जमीन पर बनी 600 मेगावाट की विद्युत क्षमता वाली रणजीत सागर बांध परियोजना शाहपुरकंडी पर पिछले पांच साल का रिकार्ड टूट गया है। सूखे की वजह से वर्तमान में झील का जल स्तर सबसे न्यूनतम स्तर 499.25 मीटर पर पहुंच गया है और पिछले साल के मुकाबले झील के जल स्तर में 10 मीटर की कमी आंकी गई है।
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जानकारी के मुताबिक वीरवार को हिमाचल के चमेरा प्रोजेक्ट से पानी की आमद 10 हजार 111 क्यूसेक थी। जबकि परियोजना से 488 मेगावाट विद्युत उत्पादन कर माधोपुर हेडवर्क्स को रावी दरिया में 10 हजार 600 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पिछले साल झील का जल स्तर 5 जुलाई को 509.82 मीटर दर्ज किया गया। जबकि 2008 में जल स्तर 512.38 मीटर, वर्ष 2009 में 500.10 मीटर, वर्ष 2010 में 500.57 मीटर दर्ज किया गया था। पिछले साल के मुकाबले झील के जल स्तर में 10 मीटर की कमी दर्ज की गई है। वैसे झील का जल स्तर सबसे कम सर्दी के मौसम में पहाड़ी हिस्सों में बर्फ के जमने की वजह से 21 फरवरी 2006 में 495.87 मीटर दर्ज किया गया, लेकिन गर्मी के मौसम में पिछले पांच साल के दौरान पहली बार सूखे की स्थिति बनी है। इसका सीधा कारण मानसून का पिछड़ना माना जा रहा है। परियोजना के अधिकारियों ने बताया कि झील के मानसून के पिछड़ने की वजह से जलाशय में पानी पीछे से ही कम आ रहा है और जितना पानी आ रहा है उसमें से पानी राजस्थान को सिंचाई के लिए भेजना पड़ रहा है।
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आरएसडी प्रशासन ने बनाए 18 कंट्रोल रुम
पठानकोट। मानसून के पिछड़ने के बाद जुलाई और अगस्त में जोरदार बारिश की आशंका के बीच रणजीत सागर बांध परियोजना शाहपुरकंडी के स्टे इलाकों में बांध प्रशासन ने समय समय पर बाढ़ की जानकारी के लिए फ्लड कंट्रोल रुम स्थापित कर दिए हैं। परियोजना के प्रोजेक्ट मंडल के एक्सईएन आरके चौधरी ने बताया कि आरएसडी शाहपुरकंडी, खैरी, बग्गी, बसोहली, ेशाहपुरकंडी, चंबा, सुरगावी, चौड़ा, छतराड़ी, भूंड, भट्टी, सवाला, बनी, बड़ग्राम, भरमौर, दयोल, चमरोड़, तीसा समेत 18 जगह बाढ़ कंट्रोल रुम बनाए गए हैं। इसके अलावा एक मोबाइल वैन समेत रावी सदन रेस्ट हाउस में वायरलेस स्टेशन स्थापित किया गया है जोकि प्रत्येक दो घंटे के बाद झील में आने वाले पानी की रिपोर्ट तैयार करेगा ताकि झील में बाढ़ से ध्यान रखा जा सकेगा। उन्होंने बताया कि परियोजना की झील में 527.91 मीटर तक पानी स्टोर किया जा सकता है। जबकि झील का जल स्तर 499.25 मीटर पर है। जबकि झील में बाढ़ के हालात पिछले साल 17 सितंबर 2011 को बने थे, जब झील में 525.20 मीटर जल स्तर पर आने की वजह से फ्लड गेट खोला गया था। उससे पहले 26 सितंबर 2010 में झील में 524.11 मीटर जल स्तर आंका गया था। उन्होंने कहा कि मानसून में देरी की वजह से बाढ़ के प्रबंधन किए गए है ताकि समय समय पर झील में पानी के स्तर का पता चल सके।
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