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प्रशासन नहीं जगा पाया उम्मीद, मजदूरी करते रहेंगे बच्चे

Pathankot Updated Tue, 26 Jun 2012 12:00 PM IST
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पठानकोट। बाल मजदूरी रोकने के लिए प्रशासन की ओर से जिले में 18 से 24 जून तक मनाया गया ‘बाल मजदूरी रोको’ सप्ताह खास असर नहीं दिखा पाया। हालांकि प्रशासन ने बाल श्रम रुकवाने के लिए जिला स्तरीय टीम का गठन किया। लेकिन टीम में शामिल अफसर बालश्रम रोकने में कम और फोटो खिंचवाने में ज्यादा मशगूल दिखाई दिए। आलम यह रहा कि सात दिन में पांच चालान भी नहीं काटे जा सके जबकि जिले में बालश्रम धड़ल्ले से जारी है। अभी भी छोटे बच्चों को ढाबों, दुकानों, होटलों, फैक्ट्रियों पर मजदूरी करते सरेआम देखा जा सकता है।
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डीसी सिब्बन सी के निर्देशों पर बालश्रम रोकने के लिए 18 जून को जिले में एक विशेष टीम बनाई गई। टीम में लेबर विभाग के इंस्पेक्टर संतोष सिंह, नगर निगम के अधिकारी जोगिंद्र गिल, पुलिस अधिकारी केदार सिंह, सिविल अस्पताल के डाक्टर दलीप कुमार, जगदीप सिंह तथा समाजसेवक विजय पासी शामिल थे। टीम ने 24 जून तक शहर के विभिन्न ढाबों व दुकानों पर छापामारी अभियान चलाया और अखबारों में खबरें भी छपी। लेकिन खास बात यह रही कि इस अभियान के दौरान काटे गए चालानों का आंकड़ा पांच को भी पार नहीं कर पाया और अधिकतर लोगों को चेतावनी देकर ही छोड़ दिया गया।
फिलहाल हकीकत सामने है। आज भी बच्चों का बचपन दुकानों पर चाय पिलाने, होटलों पर झूठे बर्तन साफ करने, कूड़ा कर्कट एकत्रित करने, भीख मांगने में गुजर रहा है। प्रशासन द्वारा चेतावनी देकर छोड़ देने से बाल श्रम करवाने वालों का डर भी निकल चुका है। प्रशासन को देखकर बाल मजदूर भाग जाते हैं या मालिक ही उन्हें भगा देते हैं।
उधर, लेबर इंस्पेक्टर संतोख सिंह ने कहा कि 18 साल से कम आयु के बच्चे से काम करवाना अपराध की श्रेणी मेें आता है। अगर कोई बाल मजदूरी करवा रहा है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
एक भी बच्चा नहीं भेजा चाइल्ड होम
नियम के तहत जो भी बच्चे बाल मजदूरी करते पकड़े जाते हैं उन्हें चाइल्ड होम भेजा जाता है। लेकिन पठानकोट से अभी तक एक भी बच्चा चाइल्ड होम नहीं भेजा गया है। लेबर इंस्पेक्टर संतोष सिंह द्वारा डल्होजी रोड स्थित फलों व जूस की दुकान पर 13 वर्षीय कर्ण पुत्र बप्पी को काम करते पकड़ा था। इस मामले में भी कोई खास कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस ने महज चालान काट अपने दायित्व से इतिश्री कर ली। इसके अलावा कई और भी कई मामले रहे जिनमें बच्चाें को चाइल्ड होम या फिर किसी भी स्कूल में दाखिल नहीं करवाया गया।

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