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रेशनलाइजेशन नीति बनी मजाक

Pathankot Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
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सुजानपुर (पठानकोट)। शिक्षा विभाग सेकेंडरी और डीजीएसई दफ्तर पंजाब की ओर से की जाने वाली शिक्षकों की रेशनलाइजेशन के तर्कसंगत न होने के चलते मजाक बनकर रह गई है। नीति को लागू करने का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों के अनुपात को ठीक करना है, जबकि उसके उलट कई स्कूलों में शिक्षकों का अनुपात गड़बड़ा गया है।
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इस संबंध में गवर्नमेंट टीचर यूनियन के प्रधान प्रेम सागर, हरेश सैनी, निर्मल कुमार, जनकराज ने बताया कि कई स्कूलों से हिंदी, पंजाबी, साइंस और अन्य विषयों के शिक्षकों की दूर बदली की गई है, उन स्कूलों में कई ऐसे हैं जिनमें अब संबंधित विषय का कोई शिक्षक बचा तक नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकारी हाई स्कूल लहरुन में हिंदी का शिक्षक शिफ्ट कर दिया गया है वहां पर हिंदी विषय का अब कोई शिक्षक नहीं है।
इसी तरह से सरकारी हाई स्कूल सारटी में अंग्रेजी का अध्यापक शिफ्ट कर दिया गया है और अब यहां अंग्रेजी का कोई शिक्षक तक नहीं बचा है। सीनियर सेकेेंडरी स्कूल माधोपुर में दो अंग्रेजी शिक्षकों को तैनात कर देने से वहां पर अब तीन शिक्षक सरपल्स हो गए हैं। ऐसे ही कई अन्य स्कूलों में भी हुआ है। जीटीयू ने मांग की है कि रेशनलाइजेशन नीति को तर्कसंगत बनाया जाए और अध्यापकों की बदली में पहले उनसे आप्शन लिया जाए और अध्यापकों की इच्छा के अनुसार स्टेशन अलाट कए जाए।
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