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मोहाली में इमीग्रेशन कंपनियों पर गिरी पुलिस की गाज, पांच कंपनी मालिकों पर दर्ज हुए केस

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली Updated Tue, 16 Apr 2019 10:15 AM IST
सांकेतिक तस्वीर
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मोहाली जिले में नियमों को ताक में रखकर चल रहीं इमीग्रेशन कंपनियों पर सोमवार को पुलिस की पचास टीमों ने शिकंजा कसा। इस मुहिम की अगुवाई 20 डीएसपी कर रहे थे। जैसे ही पुलिस की छापामारी की भनक इमीग्रेशन कंपनियों के प्रबंधकों को लगी कई कंपनियों के मालिक फरार हो गए। इस दौरान करीब पांच कंपनी प्रबंधकों पर केस दर्ज किया गया है। एसएसपी हरचरन सिंह भुल्लर ने बताया कि यह मुहिम आगे भी जारी रहेगी।
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सोमवार सुबह पूरी प्लानिंग के साथ पुलिस की टीम ने यह छापामारी की। सारी टीमों ने एक साथ कार्रवाई की। पुलिस टीमों द्वारा कंपनियों के दस्तावेज चेक किए गए। जो लोग दस्तावेज पेश नहीं कर पाए उन पर पुलिस ने कार्रवाई की।
जिक्रयोग है कि मोहाली में इमीग्रेशन फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पूरे पंजाब में मोहाली में सबसे ज्यादा इमीग्रेशन फ्रॉड के केस दर्ज होते हैं। करीब एक साल में अब तक एक हजार से अधिक इमीग्रेशन फ्रॉड केस दर्ज हो चुके हैं।

ऐसे बनी थी छापामारी की योजना
एसएसपी ने बताया कि इमीग्रेशन कंपनियां नौजवानों को विदेश में सेटल करने के बहाने बड़ी रकम लेकर धोखाधड़ी करती थीं। इसे बारे में विभाग को रोजाना शिकायतें मिल रही थीं। इसके चलते लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके बाद एसएसपी की अगुवाई में इस तरह कार्रवाई की गई।

बिना लाइसेंस से चल रही थीं कंपनियां
पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि कुछ कंपनियों के पास नियमों के मुताबिक ट्रेवल एजेंट का लाइसेंस तक नहीं था। कई लोगों ने इमारतें किराए पर लेकर अपने दफ्तर खोले हुए थे। जो लोगों से ठगी मारकर मोटी रकम वसूलते थे। इसकी रोकथाम व संबंधित कानून व नियमों को असरदार तरीके से लागू करवाने के लिए प्रशासन ने इस संबंधी एडवाइजरी जारी की गई। इसके तहत पुलिस की तरफ से यह कार्रवाई की गई।

पुलिस शिकायत होने पर हो जाते हैं फरार
पुलिस के मुताबिक जब ठगी का शिकार हुए व्यक्ति कंपनियों के खिलाफ पुलिस को शिकायत देते हैं तो ट्रेवल एजेंट शिकायत करने वालों नौजवानों को कुछ पैसे वापस कर देते हैं। साथ ही अपना दफ्तर बंद कर निकल जाते हैं।

बिना वेरिफिकेशन वालों पर दर्ज होंगे केस
एसएसपी ने बताया जब ऐसे ट्रेवल एजेंट को तलाशने की कोशिश की जाती है तो दफ्तर की इमारत के मालिक से संपर्क किया जाता है। इस दौरान तो मालिकों की तरफ से ऐसे किराएदारों संबंधी थाने में न तो कोई सूचना दर्ज करवाई होती है न ही मालिक की तरफ से इस संबंध में उनके कोई दस्तावेज रखे होते हैं। अब अपने किराएदारों की वेरिफिकेशन न करवाने वाले मालिकों के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत केस दर्ज किए जाएंगे।

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