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सेक्टर 69 का बुरा हाल.. न सीधी सड़क और न स्कूल-डिस्पेंसरी

Panchkula bureauपंचकुला ब्‍यूरो Updated Mon, 17 Feb 2020 02:09 AM IST
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मोहाली। सरकार मौजूदा हो या पिछली, सभी का दावा वीआईपी सिटी मोहाली को सिंगापुर की तर्ज पर बसाने का रहा है। सिंगापुर की तर्ज पर बसाने का दावा जिस मोहाली के लिए होता रहा है उसके सबसे प्राइम एरिया में से एक है सेक्टर-69। इस पॉश सेक्टर में कई नामचीन हस्तियां रहती हैं, लेकिन हालात यह हैं कि यह सेक्टर डेवलप होने के 20 साल बाद भी इस सेक्टर में एंट्री के लिए सीधा रास्ता नहीं होने के साथ-साथ बहुत सी समस्याएं हैं।
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करीब 20 हजार की आबादी वाले इस सेक्टर में न स्कूल है, न डिस्पेंसरी और न ही मार्केट है। यहां की सड़कों पर लावारिस पशु और आवारा कुत्ते कब्जा जमाए बैठे रहते हैं और बहुत सी बार लोग इनके साथ हादसे का शिकार हो चुके हैं और न जाने कितनी बार आवार कुत्ते बच्चों और बुजुर्गों को शिकार बना चुके हैं। अगर हम बात जीवन की सबसे उपयोगी चीज पानी की करें, तो न सिर्फ ट्राइसिटी, बल्कि पंजाब में सबसे महंगा पानी और बिजली यहां के लोग इस्तेमाल करते हैं और पानी की सप्लाई भी दिन में दो समय ही होती है। सेक्टर-69 की इन समस्याओं को लेकर अमर उजाला ने वहां के बाशिंदों के साथ संवाद का आयोजन किया। जिसमें न सिर्फ लोगों ने अपनी समस्याएं बताईं, बल्कि इन समस्याओं के हल के लिए किए जा रहे प्रयासों और उपायों पर भी अपने-अपने विचार साझा किए।
सेक्टर-69 की प्रमुख समस्याएं
- सीधा रास्ता नहीं
- सबसे महंगा पानी
- डिस्पेंसरी नहीं
- मार्केट नहीं
- सड़कों पर घूमते लावारिस पशु
- सुरक्षा के इंतजाम नहीं
स्थानीय लोगों ने बताई समस्याएं और समाधान
सेक्टर-69 की पहचान मोहाली में सबसे साफ-सुथरे और बेहतरीन सामाजिक मेल-मिलाप के लिए है। बावजूद इसके इस सेक्टर में आने-जाने के लिए किसी भी ओर से कोई सीधा रास्ता नहीं है। सेक्टर के लोग पानी के सबसे महंगे बिल जमा करवा रहे हैं। जो कि 9.40 रुपए प्रति लीटर है। पानी को लेकर संघर्ष शुरू किया गया है, जो आने वाले दिनों में और भी तेज किया जाएगा। - सतवीर सिंह धनोआ, पार्षद
गमाडा ने सेक्टर डेवलप करते हुए जो मास्टर प्लान बनाया था उसमें डिस्पेंसरी के लिए करीब 4 कनाल जगह रखी थी। यह जगह अभी तक खाली है। इलाके के लोग डिस्पेंसरी की मांग को लेकर कई बार तत्कालीन सेहत मंत्री और सेहत विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी सतीश चंद्रा से मिले थे। उन्होंने सेहत विभाग का प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहते डिस्पेंसरी के लिए निर्देश भी दिए, पर हुआ कुछ नहीं। - हरपाल सिंह
गमाडा के मास्टर प्लान में जो रास्ता है उसमें एक पुराना सरकारी प्राइमरी स्कूल रुकावट बना हुआ है। सेक्टर में सीधा रास्ता नहीं होना सबसे बड़ी समस्या है। जबकि स्कूल के लिए गमाडा ने पौने दो एकड़ जमीन सेक्टर में अलाट की हुई है, जो खाली पड़ी है। स्थानीय लोग स्कूल निर्माण में आर्थिक सहयोग देने के लिए भी तैयार हैं, लेकिन फिर भी सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। - हरभक्त सिंह बेदी
लोगों को अंदेशा है कि अगर स्कूल शिफ्ट नहीं हुआ तो गमाडा स्कूल के लिए अलाट जगह को किसी प्राइवेट कंपनी को न बेच दे। गांव लंबियां के पुराने सरकारी प्राइमरी स्कूल के कारण गमाडा के मास्टर प्लान में जो मेन रास्ता दिया गया है, वो बंद है। सेक्टर को वैकल्पिक रास्ते दिए हैं। मास्टर प्लान में स्कूल के लिए जगह दी गई है। गमाडा और शिक्षा विभाग इस स्कूल को शिफ्ट नहीं कर रहा। - दविंदर सिंह धनोआ
एक ही शहर में पानी के दो रेट और वो भी कई गुना के अंतर पर। ये लोगों के साथ धक्केशाही है। सेक्टर 66, 67, 68, 69 और 76, 77, 78, 79, 80 और एरोसिटी में पानी का रेट 9.40 रुपए प्रति लीटर है। जबकि शहर के बाकी हिस्सों में पानी का दाम 1.80 रुपए प्रति लीटर है। शहर के बाकी हिस्सों में पानी की सप्लाई तीन समय है, जबकि महंगा पानी इस्तेमाल करने वालों के लिए सप्लाई सुबह-शाम है। - कर्म सिंह मावी
सेक्टर में सुरक्षा को लेकर लापरवही की गई है और असामाजिक तत्वों के लिए यहां तमाम रास्ते खुले हैं। गांव लंबियां में डेवलपमेंट नहीं होने के कारण अवैध कब्जे हैं और कई चोर रास्ते बने हुए हैं। उधर साथ लगते कुंभड़ां में बड़ी संख्यां में पीजी खुले हैं। जहां बाहर से आए लोग रहते हैं, ऐसे में असामाजिक तत्वों का खतरा बना रहता है। पुलिस पीसीआर की गश्त भी नाम मात्र है। - सुखवंत सिंह बाठ
शहर का सबसे प्राइम सेक्टर होने के बावजूद यहां मार्केट नहीं है। एक बूथ मार्केट बनाया था, लेकिन वो भी कामयाब नहीं हो सका। यहां मार्केट नहीं होने के कारण लोगों को काफी परेशानी होती है। खरीददारी के लिए लोगों को दूर जाना पड़ता है। जिससे सामान खरीदने में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को समस्या होती है। 20 साल बाद भी गमाडा यहां मार्केट नहीं बनवा पाया। - सुरजीत सिंह सेखों
लावारिस पशु और आवारा कुत्तों के कारण सेक्टर के लोगों में दहशत रहती है। जगह-जगह लावारिस पशुओं के झुंड देखे जा सकते हैं। जिनसे वाहन चालकों को तो परेशानी होती ही है, लोगों का पैदल चलना तक मुश्किल होता है। यही हाल आवारा कुत्तों का है। लोगों ने खुद पैसे खर्च कर पार्कों को कुत्तों से सुरक्षित बनाया है, लेकिन सड़कों और गलियों से कुत्तों को कैसे भगाएं। - मेजर सिंह
सिक्योरिटी की कमी भी सेक्टर-69 की बड़ी समस्या है। सेक्टर के चारों ओर अनडेवलप लैंड है। जहां से असामाजिक तत्व आसानी से बिना किसी की नजर में आए सेक्टर में दाखिल हो सकते हैं। तकरीबन 20 हजार की आबादी वाले इस सेक्टर में एक भी पुलिस बीट बाक्स नहीं है। पीसीआर वैन राउंड जरूर करती है, लेकिन उतना काफी नहीं है। सेक्टर में पीसीआर की गश्त बढ़ाई जानी चाहिए। - सुरिंदरजीत सिंह
पानी सबसे जरूरी चीज है। सेक्टर के लोगों को सबसे मंहगा पानी मिल रहा है। सप्लाई भी सिर्फ सुबह-शाम मिलती है। जबकि शहर के बाकी हिस्सों में जहां पानी सस्ता है, सप्लाई सुबह, दोपहर और शाम तीन समय होती है। सेक्टर की बाकी व्यवस्था नगर निगम के पास है, जबकि पानी की आपूर्ति का काम गमाडा के पास है। निगम जिस दाम पर शहर में पानी दे रहा है, गमाडा उससे कई गुना दामों पर पानी बेच रहा है, यह समझ से बाहर है। - आरपी शर्मा
सेक्टर में कोई डिस्पेंसरी नहीं है, जबकि गमाडा के मास्टर प्लान में डिस्पेंसरी के लिए 4 कनाल जगह रखी गई है। पिछले साल सेहत विभाग के तत्कालीन प्रिंसिपल सेक्रेटरी सतीश चंद्रा ने यहां डिस्पेंसरी बनाने के लिए निर्देश भी दिए थे। उन्होंने इस काम के लिए फाइल तैयार कर गमाडा को भेजी थी, लेकिन सेहत विभाग और गमाडा ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। - अवतार सैनी
सेक्टर-69 के जो वैकल्पिक रास्ते हैं उन पर ट्रैफिक लाइटें नहीं हैं। जिससे अकसर सड़क हादसे होते रहते हैं। का शिकार होते हैं। एंट्री के लिए गलत तरीके से यू टर्न वाले रास्ते बनाए गए हैं या फिर रॉन्ग साइड ड्राइव वाले रास्ते हैं। ऐसे में कुंभड़ां की तरफ से आने वाले तेज ट्रैफिक से हादसों का डर बना रहता है। ट्रैफिक लाइटें और साइन बोर्ड भी नहीं लगे हुए हैं। - शरनजीत सिंह नैय्यर
सेक्टर में कई प्राइवेट स्कूल हैं। जिनकी बसें सेक्टर की गलियों से होकर ही गुजरती हैं। स्कूल बसें लेवल-सी रोड पर एंट्री नहीं कर सकती, इसके साथ ही उनके लिए गति सीमा भी निर्धारित है। इसके बावजूद इन प्राइवेट स्कूलों की बसें गलियों में धूल उड़ाती हुई तेजी से दौड़ती हैं, जो हादसे का सबब बन सकती हैं, यहां ट्रैफिक पुलिस तैनात होनी चाहिए। - दलबीर सिंह
मार्केट नहीं पर शराब ठेके चार
वीआईपी सिटी के प्राइम सेक्टर-69 में कोई मार्केट नहीं है, इससे लोगों को परेशानी होती है। वहीं, सेक्टर के चारों ओर चार शराब ठेके जरूर बने हैं। जहां शाम के समय खासी भीड़ भी रहती है। लोग बेतरतीब कारें पार्क कर शराब ठेकों पर पहुंचते हैं। इससे शाम के समय सेक्टर में आने - जाने वाली महिलाओं और बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
लोगों ने बताए समस्याओं के समाधान
रास्ता: रास्ते की समस्या पुराने प्राइमरी स्कूल के कारण बनी हुई है। जो बलौंगी-कुंभड़ा रोड पर खुलना है, या तो गमाडा मास्टर प्लान तैयार करते समय कोई दूसरा रास्ता खोलता। अब जब मास्टर प्लान में स्कूल के लिए जमीन भी अलाट है, तो फिर स्कूल शिफ्टिंग करने में 20 साल क्यों बीत गए। सरकार के पास अगर पैसा नहीं है तो स्थानीय लोग 25 लाख रुपये तक का सहयोग स्कूल बिल्डिंग बनाने में करने को तैयार हैं। इससे लोगों को साीधा रास्ता मिलेगा और सरकारी स्कूल को नई बिल्डिंग।
मार्केट: सेक्टर-69 के पास अपनी कोई मार्केट नहीं है। जबकि मास्टर प्लान में मार्केट के लिए जगह छोड़ी गई है। गमाडा मार्केट के लिए छोड़े गए कामर्शियल प्लाटों की बोली नहीं करवा रहा। एक तरफ गमाडा विकास कार्यों के लिए आर्थिक तंगी की बात कहता है, तो दूसरी तरफ कामर्शियल साइट की बोली नहीं करवाता। अगर गमाडा मार्केट के प्लाटों की बोली करवा दे, तो गमाडा को तो आमदनी होगी ही, लोगों की समस्या भी दूर होगी।
डिस्पेंसरी: मास्टर प्लान में डिस्पेंसरी के लिए भी 4 कनाल जगह दी गई है। पिछले साल सेहत विभाग के तत्कालीन प्रिंसिपल सेक्रेटरी सतीश चंद्रा के निर्देश के बाद भी काम आगे नहीं बढ़ा। स्थानीय लोग डिस्पेंसरी बनाने के लिए भी आर्थिक सहयोग करने के लिए तैयार हैं। इससे सरकार पर ज्यादा आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ेगा और लोगों को सुविधा भी मिलेगी।
पानी: पानी की आपूर्ति को छोड़कर सेक्टर की सभी व्यवस्थाएं नगर निगम के पास हैं। निगम हाउस ने सर्वसम्मति से गमाडा की जलापूर्ति को टेकओवर करने का प्रस्ताव पास किया था। जो अब सरकार के पास लंबित है। वहीं गमाडा ट्यूबवेल के पानी की सप्लाई कर रहा है, जबकि निगम को कंजौली वाटर वर्क्स से पानी मिल रहा है। अब नया टेंडर होने से कंजौली वाटर वर्क्स से मोहाली को ज्यादा पानी मिलेगा। लेकिन पानी के रेट पूरे शहर में एक जैसे होने चाहिएं।
सिक्योरिटी: सेक्टर के आसपास अनडेवलप एरिया है। पिछले 2 माह में यहां चोरी की 5 से ज्यादा वारदातें हो चुकी हैं। सुरक्षा की नजर से यहां स्थाई पुलिस बीट बाक्स होना चाहिए। पीसीआर वैन गश्त तो करती है, लेकिन महज एक पीसीआर वैन के पास सेक्टर 68-69 और कुंभड़ा का एरिया है। जो काफी ज्यादा है, सुरक्षा को देखते हुए इस एरिया में पीसीआर वैन की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
लावारिस पशु: लोगों को निकट भविष्य में इस समस्या का स्थाई हल होता नजर नहीं आता। मोहाली में कैटल शैड पहले से ही ओवरलोड हैं। ऐसे में अगर लावारिस पशुओं को पकड़ा भी जाता है तो उन्हें रखने का प्रबंध नहीं है, लिहाजा एक जगह से पकड़ कर दूसरी जगह छोड़ दिया जाता है। ऐसे में जब तक कैटल शैड या गौशाला की व्यवस्था नहीं होती इस समस्या का समाधान होना मुश्किल है।
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