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रजिस्ट्रेशन एक भी नहीं, लाइसेंस सिर्फ चालीस

Mohali Updated Tue, 01 May 2012 12:00 PM IST
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मोहाली। लोगों को साफ-सुथरे और सुरक्षित खाद्य पदार्थ मुहैया कराने के मकसद से लागू किए जा रहे फूड सेफ्टी एक्ट की राह आसान नहीं दिख रही है। इस एक्ट के तहत अब तक मोहाली जिले में किसी भी कारोबारी ने अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है। जिले भर में लाइसेंस भी सिर्फ चालीस कारोबारियों ने ही लिए हैं। जबकि, यह एक्ट हर हालत में सेहत विभाग को चार अगस्त-12 तक लागू करना है। उसके बाद लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन न होने की सूरत में चालान काटे जाएंगे।
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सेहत विभाग के अधिकारी कारोबारियों के साथ बैठकें भी कर रहे हैं। लेकिन एक्ट को लेकर व्यापारियों में दहशत का माहौल है। छोटे या बड़े कारोबारी अभी तक एक्ट से गुरेज ही कर रहे हैं। जिसके चलते इसे अमलीजामा पहनाना मुश्किल नजर आ रहा है। मोहाली समेत पूरे पंजाब से इसी तरह का फीडबैक विभाग को मिला है। जिसके बाद सेहतमंत्री मदनमोहन मित्तल ने अब खुद इसे कारगर ढंग से लागू करने की कमान संभाली है।

सेहत मंत्री मित्तल ने बुधवार को राज्य भर के खाद्य पदार्थ व्यापारियों के साथ मीटिंग करने की योजना बनाई है। मीटिंग में हर जिले से पांच लोगों को बुलाया गया है, जिनमें करियाना, दूध, बेकरी और मिठाई व्यापारी शामिल हैं। मित्तल बैठक करके जहां कारोबारियों को इस एक्ट में भागीदार बनने के लिए मोटिवेट करेंगे। वहीं, इस नए कानून को लेकर कारोबारियों के दिलों में मौजूद दहशत को भी दूर करने की कोशिश करेंगे।
गौरतलब है कि एक्ट के तहत बड़े कारोबारियों से लेकर खोखों-रेहड़ियों पर भी खाने-पीने का सामान बेचने वालों को रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। वैसे दस लाख रुपये सालाना टर्न ओवर वालों को रजिस्ट्रेशन और उससे ज्यादा वालों को लाइसेंस लेना होगा। जिला सेहत अफसर डॉ. जय सिंह ने कहा कि व्यापारियों के साथ लगातार मीटिंग की जा रही है। मोहाली और डेराबस्सी में मीटिंग करके उन्हें मोटिवेट किया गया है।

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लंबे नहीं लटकेंगे मिलावटखोरी के केस
सरकार ने प्रिवेंशन ऑफ फूड अडल्ट्रेशन एक्ट की जगह पर पिछले साल फूड सेफ्टी एक्ट लागू किया था। एक्ट मकसद मिलावटखोरी के केसों को जल्द निपटाना है। नए एक्ट में अगर कोई सैंपल फेल आता है, तो मिसब्रांडेड या सब-स्टैंडर्ड पाए जाने पर केस एडजुडिकेटिंग अफसर-कम-एडीसी को रेफर किया जाएगा। वह जिला सेहत अफसर की सलाह पर जुर्माना करेंगे। अगर सैंपल सेहत के लिए हानिकारक पाया गया, उसी सूरत में कोर्ट केस का प्रावधान है। पहले सारे केस कोर्ट में कई सालों तक चलते थे। पैरवी न होने के कारण ज्यादातर मामलों में दुकानदार बरी हो जाते थे।

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