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गमाडा नहीं लगा सका अवैध पीजी पर ताला

Mohali Updated Tue, 12 Feb 2013 05:31 AM IST
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मोहाली। शहर के लोगों के लिए समस्या का सबब बने नाजायाज पीजी हाउसेज के आगे अब गमाडा भी बेबस हो गया है। पिछले साल गमाडा ने अवैध पीजी पर शिकंजा कसने की कवायद शुरू की थी। सर्वे के बाद इन लोगों को नोटिस दिए गए। कई बार फाइनल वार्निंग नोटिस देकर लोगों को कहा गया कि या तो वे पीजी बंद कर दें या फिर रजिस्ट्रेशन कराएं। वरना अवैध पीजी पर ताला लगा दिया जाएगा। पर पीजी मालिकों पर गमाडा की चेतावनियों का कोई असर नहीं हुआ। तीन सौ से ज्यादा लोगों ने तो नोटिस का जवाब देना तक जरूरी नहीं समझा। पर इसके बावजूद गमाडा आज तक इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सका है।
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गमाडा ने पिछले साल अवैध पेइंग गेस्ट हाउसेज पर लगाम कसने को कमर कसी। तब लग रहा था कि इस बार गमाडा सख्ती के मूड में है। सबसे पहले सारे शहर में सर्वे कराया गया। जिसमें सामने आया कि शहर में 461 पीजी हाउसेज अवैध रूप से चल रहे हैं। फिर गमाडा ने इन सभी को नोटिस भेजे कि वे अपना रजिस्ट्रेशन कराएं। कई नोटिस के बाद भी कुछ नहीं हुआ। फिर गमाडा ने फाइनल वार्निंग नोटिस भेज कर आगाह किया कि अगर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया तो पीजी हाउस बंद करा दिए जाएंगे। इस फाइनल वार्निंग नोटिस का समय भी कई बार बढ़ाया गया। पर न तो लोगों के कानों पर जूं रेंगी और न ही गमाडा कुछ सख्ती कर सका।

हालत यह है कि अब करीब दस लोगों ने ही अपने पीजी का रजिस्ट्रेशन कराया है। जबकि, 145 लोग ऐसे हैं, जिन्होंने गमाडा को लिखित रूप में दिया है कि उन्होंने अपने पीजी बंद कर दिए हैं। गमाडा अब सर्वे करा कर इसकी पुष्टि कर रहा है कि ये वाकई बंद हुए हैं या नहीं। अब तक के सर्वे में करीब 70 पीजी के बंद होने की पुष्टि हो चुकी है, फिलहाल सर्वे जारी है। पर तीन सौ से ज्यादा लोग जिन्होंने न तो रजिस्ट्रेशन कराया, न पीजी बंद किए और न ही गमाडा से संपर्क तक किया, उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। गमाडा की ईओ नवजोत कौर ने कहा कि 145 पीजी बंद हुए हैं, जिनका सर्वे चल रहा है। यह पूरा होने के बाद सारा ब्यौरा जिला प्रशासन को कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।
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आरडब्ल्यूए ने की थी शिकायतें
शहर में बाहर से आने वाले स्टूडेंट्स और नौकरीपेशा लोगों की बाढ़ के चलते कई साल पहले यहां पीजी हाउसेज का कारोबार शुरू हुआ था। पर धीरे-धीरे यह पड़ोस में रहने वाले लोगों के लिए मुसीबत बनने लगा। जिसके बाद शहर की तमाम रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों ने गमाडा से शिकायतें कीं कि लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। तब 2008 में गमाडा ने पीजी पॉलिसी बनाई थी। जिसके तहत रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी किया गया था, पर इस पर अमल नहीं किया गया।


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