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शहर में सिक्योरिटी गेट सिस्टम खत्म

Mohali Updated Sat, 09 Feb 2013 05:31 AM IST
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मोहाली। नगर निगम ने लंबे विवादों के बाद आखिकार शहर में सिक्योरिटी गेट सिस्टम खत्म करने का फैसला ले ही लिया है। साढ़े तीन साल पहले शहरियों की सुरक्षा के लिए यहां सिक्योरिटी गेट सिस्टम लागू किया गया था। जो कभी विवादों से घिरा तो कभी पटरी से उतरा। अब निगम ने यह सिस्टम ही खत्म करने का फैसला ले लिया है। सिक्योरिटी गेट लगाने वाली कंपनी सेलवेल का कॉन्ट्रैक्ट खत्म किया जा रहा है। निगम कमिश्नर एके सिन्हा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि फाइल उनके पास आ गई है। निगम इस कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट रद करने जा रहा है। जल्द ही इसकी औपचारिकता पूरी कर ली जाएगी।
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तत्कालीन नगर काउंसिल ने शहर में सितंबर-2009 में शहर में सिक्योरिटी गेट सिस्टम शुरू किया था। काउंसिल ने इसके लिए सेलवेल कंपनी के साथ समझौता किया था। इसके तहत कंपनी ने सारे शहर में फेजों एवं सेक्टरों के सभी एंट्री प्वाइंट्स पर सिक्योरिटी गेट लगाने थे। बदले में कंपनी ने इन गेटों पर विज्ञापन लगाकर कमाई करनी थी। यह अपने आप में अनोखी योजना थी, जिससे वाहन चोरी समेत कई अपराधों पर लगाम लगने की उम्मीद थी। गेट सिस्टम को लेकर शुरू से ही विवाद हुए। कई सवालों के बाद इसे सुधारा भी गया। पर यह पूरी तरह सिरे नहीं चढ़ सका।

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ट्राईसिटी का पहला मॉडल था
मोहाली का सिक्योरिटी गेट सिस्टम ट्राईसिटी का पहला मॉडल था। जिसमें न लोगों को कुछ देना था और न ही काउंसिल को। कंपनी ने कमाई विज्ञापनों से करनी थी और लोगों को सुरक्षा मिलनी थी। सितंबर 2009 में शहर में 39 सिक्योरिटी गेटों के साथ यह सिस्टम शुरू किया गया था। सबसे पहले विवाद हुआ कि बगैर सिक्योरिटी गार्ड के गेटों का क्या मतलब है। कुछ पार्षदों ने कहा कि गेटों की क्वालिटी ठीक नहीं है। काउंसिल ने कंपनी के साथ नया समझौता किया। कंपनी गेटों की क्वालिटी काउंसिल के मुताबिक करने और गार्ड तैनात करने पर राजी हो गई। जनवरी-11 में नए डिजाइन के गेट लगे और काउंसिल की टीम ने जांच के बाद उसे हरी झंडी दे दी। अभी पूरे गेट लगेे नहीं थे कि मई-11 में फेज 3बी2 के गेट पर एक सिक्योरिटी गार्ड की हत्या हो गई। जिससे सारा सिस्टम फिर हिल गया। 2012 में तत्कालीन निगम कमिश्नर-कम-डीसी वरूण रूजम ने इसे रिवाइव करने की कवायद शुरू की। अक्तूबर-12 में उन्होंने कंपनी के साथ मीटिंग की। जिसमें कंपनी इस बात पर राजी हो गई कि पुरानी और नई, सभी एंट्रीज पर गेट लगाएगी। रात को सिर्फ 22 गेट खोले जाएंगे, जिन पर गार्ड तैनात होंगे। कंपनी गेटों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने पर भी राजी हो गई थी। पर उसके बाद कुछ नहीं हुआ। आखिर निगम ने कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट रद करने का फैसला कर लिया।
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निगम ने झाड़ा पल्ला, खुद करें सुरक्षा
नगर निगम ने अब सिक्योरिटी गेट सिस्टम पूरी तरह खत्म करके सारी जिम्मेदारी लोगों पर डाल दी है। यानि अगर लोग अपनी सुरक्षा चाहते हैं तो उन्हें खुद ही इंतजाम करना होगा, निगम कुछ नहीं करेगा। निगम कमिश्नर एके सिन्हा ने कहा कि अब निगम सिक्योरिटी गेट नहीं लगवाएगा। शहर की जिन रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों को लगता है कि सिक्योरिटी गेट ठीक हैं, वह अपने फेजों या सेक्टरों के एंट्री प्वाइंट्स पर लगवा सकती हैं। उनका सारा संचालन भी उन्हें ही करना होगा। निगम भविष्य में कोई सिक्योरिटी गेट नहीं लगवाएगा।


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