फिर लटका सिक्योरिटी गेटों का मुद्दा

Mohali Updated Mon, 26 Nov 2012 12:00 PM IST
मोहाली। शहर और शहरियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए सिक्योरिटी गेटों का मुद्दा एक बार फिर लटक गया है। पिछले महीने तत्कालीन निगम कमिश्नर-कम-डीसी वरुण रूजम ने गेट लगाने वाली कंपनी सेलवेल के अधिकारियों के साथ मीटिंग कर नए सिरे से सिस्टम लागू करने योजना तैयार की थी। जिससे लोगों को नई उम्मीद बंधी थी। लेकिन डेढ़ महीने बाद भी नए सिस्टम को लेकर कुछ नहीं हुआ। इस बीच गमाडा सीए एके सिन्हा को निगम कमिश्नर का चार्ज दे दिया गया।
सेलवेल अधिकारियों ने दस अक्तूबर को डीसी के साथ हुई मीटिंग में सिक्योरिटी गेट सिस्टम संबंधी सारी शर्तें मानीं थीं। नए सिस्टम के तहत शहर के सभी फेजों और सेक्टरों के एंट्री प्वाइंट्स पर गेट लगने थे, जोकि लगे हुए हैं। योजना थी कि रात को सिर्फ 22 गेट ही खोले जाएंगे, बाकी बंद रहेंगे। खुले हुए गेटों पर सिक्योरिटी गार्ड तैनात किए जाएंगे। इन्हीं गेटों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे। यह भी शर्त थी कि इन 22 गेटों के बारे में इलाके के लोगों को जानकारी देने के लिए रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों और पूर्व पार्षदों की मदद से मीटिंग कराई जाएंगी। नए सिस्टम में यह शर्त भी जोड़ी गई थी कि शॉर्पिंग स्ट्रीट चौड़ी करते समय मार्केटों के पीछे की तरफ पार्किंग बनाई गई थीं। जिसके लिए नए रास्ते भी निकाले गए थे। शर्त के मुताबिक कंपनी ने इन नए एंट्री प्वाइंट्स पर भी छोटे गेट लगाने थे। ऐसे करीब तीस एंट्री प्वाइंट्स की पहचान की गई थी, जिन पर छोटे गेट लगाकर रात को बंद किया जाना था। पर मीटिंग को डेढ़ महीना बीतने के बाद भी कंपनी ने योजना पर अमल नहीं किया है।

-- क्या कहते हैं अधिकारी
गमाडा सीए-कम-निगम कमिश्नर एके सिन्हा ने कहा कि वह पहले निगम और सेलवेल के बीच हुआ एग्रीमेंट स्टडी करेंगे। फिर उस एग्रीमेंट के मुताबिक जो शर्तें हैं, उन्हें लागू कराया जाएगा।

-- बॉक्स
तीन साल में नहीं लागू हो सका सिस्टम
तत्कालीन नगर काउंसिल ने सितंबर-09 में ट्राईसिटी का अपनी तरह का पहला सिक्योरिटी गेट सिस्टम लागू किया था। जिसमें सारा खर्च कंपनी ने करना था और गेटों पर विज्ञापन लगाकर अपनी आमदनी करनी थी। पर तीन साल बाद भी यह लागू नहीं हो सका। तब से यह विवादों का ही मुद्दा बना। पहले यह सवाल उठा कि बगैर गार्ड के गेटों का क्या फायदा। फिर कंपनी ने गार्ड तैनात करने पर हामी भर दी। उसके बाद विवाद हुआ कि गेटों की क्वालिटी खराब है। फिर कंपनी ने काउंसिल के स्पेसिफिकेशंस के मुताबिक गेट तैयार कराए। नए डिजायन के गेट जनवरी-11 में लगने शुरू हो गए। सिस्टम ट्रैक पर आ रहा था, तभी मई-11 में 3बी2 गेट पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड की हत्या हो गई। जिसके बाद सिस्टम ठप हो गई। अक्तूबर-12 में डीसी रूजम ने इसे नए सिरे से चलाने की कवायद शुरू की थी।

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रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन नाराज
सिक्योरिटी गेट सिस्टम के पटरी पर न आने से रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन खासी नाराज हैं। फेज एक आरडब्ल्यूए के प्रधान पीएस विरदी ने कहा कि नए सिस्टम में कुछ नहीं हुआ है। न तो गार्ड गेटों पर होते हैं और न ही कोई सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है। जल्द ही एसोसिएशन नए निगम कमिश्नर से इस संबंध में मुलाकात करेगी। वहीं, फेज सात आरडब्ल्यूए के प्रधान बलकरन सिंह भट्टी ने कहा कि मेन गेट पर सिस्टम लागू नहीं हो सका था। वहीं, फेज सात मार्केट के पीछे पार्किंग बनाने के चक्कर में कई नई एंट्री खुल गई हैं। अब या तो प्रशासन रात को सारा रिहायशी इलाका सील करवाए, या गेटों को हटा ही दिया जाए।

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