नए सेक्टरों के किराएदारों के नहीं बने वोट

Mohali Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST
मोहाली। बूथ लेवल पर वोट बनाने का काम रविवार को खत्म हो गया। पर नए सेक्टरों में किराए पर रहने वाले हजारों लोगों के वोट ही नहीं बन सके। वजह यह थी कि ये सेक्टर न तो नगर निगम के अधीन हैं और न ही किसी ग्राम पंचायत में आते हैं। इसलिए न तो इनका कोई पार्षद है और न ही कोई सरपंच। ऐसे में शिनाख्त न हो सकने के कारण इन लोगों के वोट ही नहीं बनाए गए। बूथ पर बैठे बूथ लेवल अफसरों (बीएलओ) ने इनके वोट बनाने में असमर्थता जता दी।
शहर में सेक्टर 66, 67, 68, 69 और सेक्टर 76 से लेकर 80 तक पंजाब के एकमात्र सेक्टर हैं, जिनका कोई जन प्रतिनिधि ही नहीं है। वरना हर इलाका या तो निगम, काउंसिल के अधीन है या फिर किसी पंचायत में आता है। पर इन सेक्टरों का कोई नामलेवा नहीं है। इसलिए यहां के लोगों को रोज किसी न किसी समस्या से जूझना पड़ता है। अब ताजा समस्या वोट बनवाने में आई है।
सेक्टर 68 स्थित गुरु नानक स्कूल में बूथ बनाया गया था। जहां बीएलओ वोट बना रहे थे। पर उन्होंने किराएदारों के वोट बनाने से इंकार कर दिया। बीएलओज का कहना था कि लोग या तो राशन कार्ड लाएं या बिजली का बिल। समस्या यह है कि यहां मुश्किल से दस फीसदी लोग होंगे जिनके राशन कार्ड बने हैं। बिजली के बिल मकान मालिकों के नाम पर होते हैं। ऐसे शिनाख्ती कार्ड न होने के कारण इनके वोट नहीं बन पा रहे हैं। अगर कोई शिनाख्ती कार्ड न हो तो पार्षद या सरपंच की शिनाख्त पर भी वोट बन सकता है। पर यहां पर कोई जनप्रतिनिधि नहीं है। यहां की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान मनोज अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने बीएलओ राजिंदर सिंह से कहा कि फुटपाथ पर रहने वाले लोगों की शिनाख्त तो खुद बीएलओ करके वोट बनाते हैं। किराएदारों की भी वही कर दें। तो बीएलओ ने खुद को असमर्थ बताया। अग्रवाल ने प्रशासन से मांग की कि जब तक इन सेक्टरों के लोगों का कोई जन-प्रतिनिधि नहीं है, तब तक इनकी रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों को ही शिनाख्त का अधिकार दिया जाए, ताकि लोगों को परेशान न होना पड़े।

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हर सर्टिफिकेट बनवाने में आती है दिक्कत
नए सेक्टरों में किराएदारों को तो सिर्फ वोट बनाने में परेशानी झेलनी पड़ रही है। पर यहां रहने वाले लोगों को हर रोज इस समस्या से जूझना पड़ता है। कोई जनप्रतिनिधि न होने के कारण हर सर्टिफिकेट बनवाने में दिक्कत आती है। बच्चों की पढ़ाई के सर्टिफिकेट हों या मैरिज सर्टिकिेट, या फिर आर्म्स लाइसेंस ही हो, सभी में जनप्रतिनिधि की शिनाख्त मांगी जाती है। सरकारी दफ्तरों में कहा जाता है कि पार्षद या सरपंच से लिखा कर लाओ। वे हैं नहीं, तो काम ही नहीं हो पाते।

क्या कहते हैं अधिकारी
डिप्टी कमिश्नर वरुण रूजम ने कहा कि गलत वोट न बन जाए इसलिए ऐहतियात बरती जाती है। पर बीएलओ के पास यह भी विकल्प है कि वह पड़ोस से वैरिफिकेशन कर सकते हैं या किसी और तरीके से। वह देखेंगे कि किराएदारों के वोट बनने में क्या दिक्कतें आ रही हैं, समस्या हल की जाएगी क्योंकि अभी समय है।

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