एनओसी लिए बिना भी हो सकती है हदबंदी

Mohali Updated Sun, 02 Sep 2012 12:00 PM IST
मोहाली। नगर निगम की हदबंदी करके शहर का विकास तेज करने का रास्ता निकाल लिया गया है। लीगल एडवाइजर की राय में सामने आया है कि कानून के अनुसार निगम को उन पंचायतों से एनओसी लेने की जरूरत ही नहीं है, जिन्हें निगम की हद में शामिल किया जाना है। अगर यह योजना सिरे चढ़ती है तो निगम की हदबंदी की कवायद जल्द शुरू हो सकती है। इसके बाद शहर के विकास का ग्राफ भी तेजी से बढ़ेगा।

अधर में थी हदबंदी की प्रक्रिया
नगर निगम ने स्थानीय निकाय विभाग को नई हदबंदी की सिफारिश भेजी थी, जिसमें तत्कालीन नगर काउंसिल द्वारा दिसंबर-10 में पास प्रस्ताव को आधार बनाया गया था। उसमें सभी पार्षदों ने सर्वसम्मति से मोहाली विधानसभा हलके के सारे एरिया को निगम में शामिल करने का प्रस्ताव पास किया था। शहरी क्षेत्र और सारे गांवों को निगम में शामिल करने का वही प्रस्ताव निगम ने पिछले दिनों निकाय विभाग को भेजा था, लेकिन विभाग ने यह कहकर फाइल लौटा दी थी कि पहले उन सभी गांवों से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लिए जाएं, जिन्हें निगम की हद में शामिल किया जाना है। इसके बाद हदबंदी की प्रक्रिया लटक गई थी।

लीगल एडवाइजर ने भेजी रिपोर्ट
निगम ने यह केस अपने कानूनी सलाहकार को रेफर करके उनकी राय मांगी थी। निगम के लीगल एडवाइजर ने अपनी रिपोर्ट के साथ फाइल निगम को भेज दी, जिसमें कहा गया है कि कानून के मुताबिक निगम को सभी गांवों की पंचायतों से एनओसी लेनी की जरूरत ही नहीं है। क्योंकि हदबंदी की प्रक्रिया शुरू करने के बाद वैसे ही सार्वजनिक तौर पर ऐतराज सुनने का प्रावधान है। अगर किसी पंचायत को कोई भी ऐतराज होगा तो वह दर्ज करा सकती है। इसलिए एनओसी लिए बगैर भी हदबंदी की प्रक्रिया शुरू करवाई जा सकती है।

रामूवालिया की चलेगी मर्जी!
कानूनी राय आने के बाद नगर निगम की हदबंदी की प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता तो साफ हो चुका है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि इस मामले में आखिरी मर्जी सत्ताधारियों की ही चलेगी। इसकी वजह यह है कि हदबंदी के साथ ही निगम चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू करनी होगी। क्योंकि पिछले काउंसिल चुनाव 2006 में हुए थे और नए चुनाव ड्यू हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि हलका इंचार्ज होने के नाते बलवंत सिंह रामूवालिया ही तय करेंगे कि निगम की हदबंदी की प्रक्रिया शुरू की जाए या फिर इसे लटकाया जाए। रामूवालिया कैंप भी सारे हालातों पर नजर रखे हुए हैं। इसका आकलन किया जा रहा है कि कब निगम चुनाव कराना उनके फायदे में रहेगा?

कोट्स......
एलए की रिपोर्ट आ गई है। इसे निकाय विभाग को भेजना है या फिर गांवों की पंचायतों से एनओसी लेना है, इस पर निगम कमिश्नर ही फैसला लेंगे।
- जगजीत शाही, ईओ, नगर निगम

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