घर के नरक से मुक्त कराई युवती

Mohali Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
खरड़ (मोहाली)। अंधविश्वास के चलते एक मां ने बेटे की सहायता से अपनी नौजवान पोस्ट ग्रेजुएट अविवाहित बेटी को करीब छह माह से एक कमरे में निवस्त्र हालत में बंद कर रखा था। लड़की को नहाने एवं शौच के लिए जाने की भी इजाजत नहीं थी। उसे जानवरों की तरह बांधकर रखा गया था। बुधवार को जब एक एनजीओ ने पुलिस की मदद से उसे मुक्त कराया तो कमरे में काफी दुर्गंध और गंदगी थी। पुलिस ने मौके पर स्वास्थ्य विभाग की टीम को बुलाया और उसकी मदद से बड़ी मशक्त के बाद युवती को कपड़े पहनाए। उस दौरान युवती चीखती चिल्लाती रही। उसे जबरन ऐबुलेंस में डालकर पीजीआई पहुंचाया गया। वहां उसका इलाज किया जा रहा है।
एनजीओ को सूचना मिली थी कि गांव बलौंगी की दशमेश कालोनी की गली नंबर 9 के मकान नंबर 173 में बलविंदर कौर नामक महिला और उसके बेटे ने जसविंदर कौर (25 वर्षीय) को एक वर्ष से घर के ही एक कमरे में बंधक बना रखा है। युवती को जिस कमरे में रखा गया था उसमें बाहर से ताला जड़ा था। कई महीनों से इस लड़की को किसी ने घर के आंगन में भी आते नहीं देखा। उसकी चीख-पुकार लोगों को अक्सर सुनने को मिलती रही है। एनजीओ की टीम घर पर पहुंची और मां बलविंदर कौर से बातचीत की। मां ने उन्हें युवती से मिलने से इंकार कर दिया। इसके बाद एनजीओ ने बलौंगी पुलिस को सूचित किया। महिला ने पुलिस को भी घर में नहीं जाने दिया, लेकिन सख्ती बरतने पर पुलिस ने जिस कमरे में लड़की बंद थी, को खुलवाया। कमरे से भयंकर बदबू आ रही थी। गंदगी के आलम में युवती बिस्तर पर मौजूद थी। पुलिस और एनजीओ टीम यह देख कर हैरान थी कि युवती बिस्तर पर बिना किसी वस्त्र के बेसुध पड़ी थी। उसके बाल भी काटे हुए थे। पुलिस ने युवती को चादर से ढका और मां से पूछताछ की।
घर से भागने की जिद करती थी : मां
मां ने बताया कि करीब छ: माह पूर्व उसकी बेटी किसी रिश्तेदार के घर राजपुरा गई थी। घर लौटने पर उसकी हालत बिगड़ गई। घर से भागने की जिद करने लगी। इस वजह से उसे कमरे में बंद किया गया। मां का मानना है कि उसकी बेटी पर ऊपरी (भूत-प्रेत) असर है। वह कई ओझा और तांत्रिकों के पास धक्के खा चुकी है। दूसरी ओर वह कहती है कि उसने कभी भी बेटी का इलाज नहीं कराया। आज हालात यह है कि बेटी मानसिक संतुलन खो बैठी है। घर पर मौजूद युवती के भाई गुरविंदर सिंह के अनुसार उनकी बहन पोस्ट ग्रेजुएट है, लेकिन किसी ऊपरी असर के चलते वह अपना आपा खो बैठी है।
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युवती अभी बयान देने की हालत में नहीं
बलौंगी के थाना प्रभारी दीपइंदर सिंह के अनुसार युवती अभी बयान देने की स्थिति में नहीं है। बयान होनेे के बाद ही किसी के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकेगी। फिलहाल पीड़िता को इलाज की जरूरत है। जिसके लिए उसे अस्पताल पहुंचा दिया गया है।
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पढ़ाई में तेज थी
स्थानीय कुछ लोग मां और भाई की बातों से इत्तफाक नहीं रखते। वे दोनों के तर्क को को मानने को तैयार नहीं है। लोगों का कहना है कि युवती के पिता की कुछ वर्ष पूर्व मौत हो चुकी है। वह बहुत ही होशियार और खूबसूरत थी। उच्च शिक्षा होने के कारण ट्यूशन्स भी पढ़ाती थी। मां और भाई की सख्ती से वह पागल हो गई है।
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एनजीओ की भूमिका सराहनीय
युवती को बंधन मुक्त कराने में सबसे बड़ा हाथ एनजीओ का रहा। गुप्त सूचना के आधार पर इस कार्रवाई को एंटी करेप्शन एंड ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरप्रीत सिंह वालियां के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। एनजीओ टीम को बलौंगी पुलिस की भी मदद लेनी पड़ी। इस कार्य में संगठन के महासचिव राम भाटिया और कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा। बालियां ने पत्रकारों को बताया कि उन्हें युवती के एक साल से बंधक बनाए रखने की सूचना मिली थी।

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