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कमिश्नर के चक्कर में लटका शहर का विकास

Mohali Updated Wed, 30 May 2012 12:00 PM IST
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मोहाली। तत्कालीन नगर काउंसिल ने करीब डेढ़ साल बाद शहर की सुध लेते हुए विकास का पहिया चलाने की कवायद शुरू की थी। जिसके तहत करीब सात करोड़ के विकास कार्य करवाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। विकास कार्यों के टेंडर भी मांगे गए। लेकिन इसी बीच हाईकोर्ट का फैसला आया और मोहाली को नगर निगम बना दिया गया। जिसके बाद सारे विकास कार्य लटक गए। क्योंकि निगम कमिश्नर के अलावा किसी के पास भी टेंडर खोलने का अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट का फैसला आए कई दिन बीत गए हैं, फिर भी सरकार ने मोहाली निगम में कोई कमिश्नर नियुक्त नहीं किया है। जिसका खामियाजा शहर के लोगों को उठाना पड़ रहा है।
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मोहाली नगर काउंसिल को जनवरी-11 में सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर नगर निगम का दर्जा दे दिया था। उसके बाद यह कमिश्नर के रूप में डिप्टी कमिश्नर या गमाडा सीए को अतिरिक्ति चार्ज भी दिया जाता रहा। बाद में एक याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने निगम के नोटिफिकेशन पर स्टे लगा दी। जिससे यह फिर नगर काउंसिल बन गई। उसी केस पर आठ मई-12 को हाईकोर्ट का फैसला आ गया और मोहाली नगर निगम को बहाल कर दिया गया।

लेकिन इससे पहले ही मई की शुरुआत में तत्कालीन नगर काउंसिल ने सात करोड़ के विकास कार्यों के टेंडर मांगे। पहली बार यह टेंडर ई-टेंडरिंग के जरिए मांगे गए। जिनकी टेक्निकल बिड 29 मई और फाइनांशियल बिड तीस मई को खुलनी थी। पर इसी बीच काउंसिल को निगम बनाने से नई अड़चनें पैदा हो गईं। निगम कमिश्नर नियुक्त नहीं किया गया और उसके अलावा किसी के पास टेंडर खोलने का अधिकार नहीं था। जिसके चलते अधिकारियों ने टेंडर फिलहाल स्थगित कर दिए और शहर का विकास एक बार फिर लटक गया है। इससे पहले तत्कालीन नगर काउंसिल दिसंबर-10 को हुई सदन की मीटिंग में पास विकास कार्यों के टेंडर लगवाए थे। उसके बाद से विकास कार्य लगभग ठप पड़ा था।

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कौन से विकास कार्य होंगे लेट
इस बार बड़े पैमाने पर शहर के लंबे समय से लटके काम शुरू कराने की योजना बनाई गई थी। जिसके पहले चरण में फुटपाथ, पेवर ब्लॉक और स्ट्रीट लाइटों के काम थे। सेक्टर 71, फेज नौ, फेज दस के पार्कों का विकास, फेज एक व छह में पेवर ब्लॉक, फेज सात में पार्कों का विकास, इंडस्ट्रियल एरिया फेज सात की ग्रीन बेल्ट में लाइटिंग, फेज चार के एचएम क्वार्टरों में पेवर ब्लॉक, फेज 11 में फुटपाथ रैंप समेत कई काम शामिल थे। अब कमिश्नर की नियुक्ति के बाद नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया होगी, फिर ये काम शुरू हो सकेंगे।

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