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शारजाह में फंसे 17 भारतीय युवकाें का मामला

Ludhiana Updated Tue, 12 Feb 2013 05:31 AM IST
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हलवारा (लुधियाना)। जनवरी 2009 में शराब की तस्करी को लेकर शारजाह में हुए झगड़े में पाकिस्तानी नागरिक मिश्री खान की मौत के बाद कानूनी चक्रव्यूह में उलझे 17 भारतीय युवकों की वतन वापसी आज होगी। इस कानूनी प्रक्रिया से युवकों को सुरक्षित बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाने वाले दुबई के होटल व्यवसायी एसपी सिंह ओबराय भी उनके साथ भारत आ रहे हैं।
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इस मामले में फांसी की सजा तक का आदेश सुनने से लेकर रिहाई तक के सफर में आई एक के बाद एक जबरदस्त मुश्किलों को पार पाकर सभी युवकों को अब भारत का टिकट मिल गया है। सभी युवक एयर इंडिया की फ्लाइट से बुधवार सुबह दिल्ली पहुंचेंगे। इसके बाद वह सीधे अमृतसर जाकर श्री दरबार साहिब में माथा टेकेंगे। इसके बाद अपने-अपने घरों को रवाना होंगे।

होटल व्यवसायी एसपी सिंह ओबराय ने इस केस में सहयोग के लिए विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर, अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुखदेव सिंह ढींढसा, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, भारतीय दूतावास के अधिकारियों का धन्यवाद किया है। रविवार को ओबराय ने सभी युवकाें से मुलाकात करके उनको तमाम औपचारिकताएं पूरी होने की बात कहीं।
इस मामले में फंसे युवक सुखजोत सिंह के पिता जगदेव सिंह का कहना है कि उन्होंने पिछले तीन साल का वक्त उम्मीदों की रोशनी के साथ बिताया है। कई बार उम्मीदों ने साथ छोड़ दिया था, लेकिन मन का विश्वास था कि उनका लाडला जरूर वापस आएगा। एसपी सिंह ओबराय की मेहनत के दम पर ही युवकों की वापसी संभव हो पा रही है। उनका यह ऋण पूरे जीवन भर नहीं चुकाया जा सकता।
मामले में फंसे भारतीयों के नाम
सुखजिंदर सिंह, सुखजोत सिंह, राम सिंह, अरविंदर सिंह, बलजीत सिंह, दलजीत सिंह, धर्मपाल सिंह, सतगुर सिंह, सतनाम सिंह, कश्मीर सिंह, सुबन सिंह, कुलविंदर सिंह, कुलदीप सिंह, सुखजिंदर सिंह, नमजोत सिंह, हरजिंदर सिंह, तरनजीत सिंह
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घटनाक्रम----
9 जनवरी 2009-- शारजाह में शराब तस्करी को लेकर हुए झगड़े में पाक नागरिक मिश्री खान की हत्या, मिश्री खान का भाई मोहम्मद नवाज के अलावा मुश्ताक अहमद एवं शाहिद इकबाल (दोनों भाई) जख्मी हुए। इस आरोप में पुलिस ने 16 पंजाबियों और एक हरियाणा के युवक को आरोपी बनाया।
28 मार्च 2010--- निचली अदालत ने 17 युवकों को फांसी की सजा सुनाई।
8 अप्रैल 2010-- मामला अपील अदालत में पहुंचा। भारत सरकार ने इस केस में पांच वकील नियुक्त किए।
3 दिसंबर 2010-- सुनवाई--रमजान ने पावर ऑफ अटार्नी हासिल की और स्टेटमेंट दिया कि मृतक का परिवार समझौते एवं मुआवजे के लिए तैयार।
24 फरवरी 2011-- सुनवाई--रमजान ने कहा कि समझौते के लिए कोई आगे नहीं आया। अदालत ने इसके लिए दो माह का वक्त दिया।
28 अप्रैल 2011-- सुनवाई--परिवार के आगे न आने पर अदालत ने शरिया कानून के मुताबिक 200,000 दिराम दिया रकम (ब्लड मनी) देने का आदेश सुनाया। न्यायधीश ने अदालत के बाहर भी समझौते का रास्ता खुला रखा। इसके लिए तीन सप्ताह का वक्त दिया गया। लेकिन मामला फिर भी नहीं तय हुआ।
19 मई 2011-- अदालत ने रमजान से समझौते के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि परिवार बदले की मांग कर रहा है। इसके बाद होटल व्यवसायी एसपी सिंह ओबराय ने कहा कि वह मृतक के परिवार को दस मिलियन पाक मुद्रा देने को तैयार है। इसके बाद अदालत ने समझौते के लिए और वक्त दे दिया।
20 जुलाई 2011-- मोहम्मद रमजान ने अदालत को बताया कि मृतक का परिवार अब समझौते के लिए तैयार है।
27 जुलाई 2011-- अदालत में एसपी सिंह ओबराय ने ब्लड मनी का भुगतान कर दिया गया।
12 सितंबर 2011-- 18 माह के बाद युवकों की फांसी की सजा माफ हो गई और उनको दो साल की कैद की सजा सुनाई गई। जो वह पहले ही पूरी कर चुके थे। इसके बाद युवकों को आउट जेल में भेज दिया गया और वह 23 सितंबर 2011 को वापस वतन पहुंचने वाले थे। लेकिन 21 सितंबर को उनको फिर से शारजाह की जेल में डाल दिया गया और उनके यात्रा करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। क्योंकि घटना में घायल भाईयों मुश्ताक अहमद एवं शहिद इकबाल ने भी मुआवजे के लिए याचिका दायर कर दी। मुश्ताक और शाहिद ने डेढ़ मिलियन दिराम मुआवजे की मांग की।
13 दिसंबर 2012-- सुनवाई में मुश्ताक एवं शाहिद दस्तावेज दिखाने में असफल रहे और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। 17 जनवरी 2013 को अदालत ने दोनों के लिए एक लाख दिराम का मुआवजा तय कर दिया। लेकिन दोनों संतुष्ट नहीं थे और उपरी अदालत में जाने की तैयारी करने लगे। एसपी सिंह ओबराय उनको अदालत के बाहर मामला तय करने के लिए मनाते रहे।
3 फरवरी 2013-- मुश्ताक और शहिद समझौते के लिए तैयार हो गए।
4 फरवरी 2013-- दोनों ने अदालत में मुआवजे की रकम वसूल कर ली और अपना केस वापस ले लिया।
6 फरवरी 2013-- मृतक मिश्री खान के परिवार के पावर ऑफ अटार्नी मोहम्मद रमजान ने घटना में घायल मिश्री के भाई मोहम्मद नवाज के लिए मुआवजे की मांग को लेकर याचिका डालने जा रहे थे। एसपी सिंह ओबराय ने उनको अदालत के बाद ही मामला निपटाने को कहा और बात बन गई।
11 फरवरी 2013-- 13 युवकों को सेंट्रल जेल से आउट जेल में शिफ्ट कर दिया गया। चार युवकों पर अन्य मामला होने के कारण वह सेंट्रल जेल में थे, काफी दिक्कतों के बाद उनको भी अब क्लीयरेंस मिल गया है।

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