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प्रोत्साहन पैकेज से नाखुश निर्यातक

Ludhiana Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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लुधियाना। देश से होने वाले निर्यात में आ रही गिरावट को रोकने और उद्यमियों को मंदी से उबारने के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित प्रोत्साहन पैकेज पंजाब के निर्यातकों को रास नहीं आ रहा है। उनका कहना है कि मंदी से निकालने और निर्यात बढ़ाने के लिए अधिक इंसेंटिव की जरूरत महसूस की जा रही है। निर्यातकों की उत्पादन और ढुलाई लागत में लगातार इजाफा हो रहा है।
रेलवे ने कुछ दिन पहले ही लुधियाना से मुंबई पोर्ट के लिए माल भाड़े में करीब तीस फीसदी का इजाफा किया है। इस वृद्धि ने निर्यातकों के तमाम समीकरण बिगाड़ कर रख दिए हैं। उनका कहना है कि ऐसे में प्रोत्साहन पैकेज के लाभ बेमानी साबित होंगे।
ईईपीसी इंडिया में बाइसाइकिल पैनल के चेयरमैन सतीश ढांडा कहते हैं कि क्रास सब्सिडी की नीति के चलते उद्योग जगत का भला नहीं हो सकता। इसके तहत सुविधाएं कमजोर वर्ग को मिलती हैं और भरपाई उद्यमियों से की जा रही है। जबकि गलाकाट प्रतिस्पर्धा में उद्यमी को बाजार की चुनौतियों का मुकाबला करना लगातार कठिन हो रहा है। इसके अलावा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार को नई नीति बनानी होगी। इसमें निर्यात जोन बना कर उनके अलग से श्रम एवं अन्य कानून बनाने होंगे। यहां पर उत्पादन लागत को कम करने के लिए करों में राहत समेत सभी सहूलियतें देनी होंगी।
ईईपीसी के पूर्व रीजनल चेयरमैन एवं लुधियाना हैंड टूल्स एसोसिएशन के प्रधान एससी रल्हन का कहना है कि मंदी के दौर में मौजूदा विदेशी खरीदारों को संभालना ही मुश्किल हो रहा है। ऐसे में निर्यातक नए मार्केट में जाकर नए ग्राहक से कारोबार करने का रिस्क लेने की स्थिति में नहीं है। नतीजतन फोक स मार्केट के विस्तार का लाभ नहीं मिलने वाला। हां, इसमें मिल रही राहतों में इजाफा करना अनिवार्य था। निर्यातकों को अपने मौजूदा ग्राहकों से बेहतर कारोबार के लिए और इंसेंटिव की दरकार है। इस विषय पर सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया।
इंजीनियरिंग एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट राजिंदर जिंदल ने कहा कि प्रोत्साहन पैकेज में दो फीसदी ब्याज में मिल रही छूट की अवधि बढ़ाने का स्वागत किया है। जिंदल ने कहा कि मंदी के भंवर में फंसे निर्यातकों को उबारने के लिए सरकार को ओर इंसेंटिव देने होंगे।
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वित्तीय राहत देने पर ही पटरी पर आएगा निर्यात
निटवियर एंड टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स आर्गेनाजेशन के प्रेसिडेंट अजीत लाकड़ा ने कहा कि सरकार ने प्रोत्साहन पैकेज में कोई नई राहत नहीं दी है। पैकेज वाली अधिकतर राहत पहले से ही दी जा रही हैं। निर्यातकों को और वित्तीय राहतें देकर ही पटरी पर लाया जा सकता है। लाकड़ा ने कहा कि दो फीसदी ब्याज की अवधि बढ़ाना सराहनीय कार्य है।

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यह है केंद्र का प्रोत्साहन पैकेज
-दो फीसदी ब्याज में छूट की योजना को 31 मार्च 2014 तक बढ़ाया
-छूट का लाभ छोटे, मझोले और हस्तशिल्प, हथकरघा, एग्रो प्रोसेस फूड, खेल का सामान, रेडीमेट गारमेंट आदि के निर्यातकों के लिए
-योजना का लाभ इंजीनियरिंग उद्योग के उत्पादों को भी
-फोकस प्रोडक्ट स्कीम में सौ नए उत्पाद शामिल किए
-फोकस मार्केट स्कीम में न्यूजीलेंड, केमिन, आईलैंड, लिथुआनिया, बुलगारिया को जोड़ा
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ये मांगा निर्यातकों ने
-निर्यातकों को वैट से मुक्त किया जाए
-ड्रा बैक की दरों में इजाफा किया जाए
-फ्रेट सब्सिडी दी जाए

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