किसानों ने खारिज की गेहूं की एमएसपी में बढ़ोतरी

Ludhiana Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST
लुधियाना। केंद्र सरकार की ओर से अगले रबी सीजन के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में की गई 65 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि को पंजाब के किसानों ने खारिज कर दिया है। किसान संगठनों का तर्क है कि खाद, डीजल, श्रम और महंगाई के कारण किसान की लागत में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन उसके अनुसार गेहूं की एमएसपी में वृद्धि नहीं हो रही है। सरकार के इस फैसले के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) ने एक जनवरी को चंडीगढ़ में बैठक बुलाई है, जबकि भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल 18 मार्च को दिल्ली की नाकाबंदी करेगी। किसान संगठनों की मांग है कि गेहूं की एमएसपी कम से कम 2300 रुपये प्रति क्विंटल की जाए।
केंद्र सरकार ने अगले साल के लिए गेहूं की एमएसपी को पिछले साल के रेट 1285 पर ही स्थिर रखा था, लेकिन पंजाब सरकार और किसानों के विरोध के कारण अब इसमें 65 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा करके 1350 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इस पर भी किसान संगठन खुश नहीं हैं। किसानों ने साफ किया है कि सरकार उनके हितों के साथ खिलवाड़ कर रही है।
बीकेयू राजेवाल के स्टेट प्रेसिडेंट बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि एक साल में डीएपी खाद का दाम 467 से बढ़ कर 1210 रुपये प्रति बोरी हो गया है। जबकि डीजल की कीमत में भी काफी वृद्धि हुई है। इसके अलावा लेबर और जमीन का ठेका भी महंगा हो गया है। इन हालात में गेहूं का एमएसपी कम से कम 2395 रुपये प्रति क्विंटल होना अनिवार्य है। राजेवाल का आरोप है कि सरकार ने 1966-67 से लेकर 2007-08 तक गेहूं एवं धान का कम एमएसपी घोषित करके किसानों को 61,696 करोड़ रुपये की चपत लगाई है। राजेवाल ने दावा किया कि किसान को यदि उसकी फसल की पूरी कीमत मिले तो किसान कर्जाई नहीं होगा। किसान के कर्ज में डूबने के पीछे केंद्र सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं।
बीकेयू लक्खोवाल ने केंद्र सरकार से मांग की है कि कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एवं प्राइसेस (सीएसीपी) को तुरंत खत्म किया जाए। सीएसीपी का किसानों को कोई फायदा नहीं है। लक्खोवाल ने कहा कि 1350 रुपये का एमएसपी किसान को मंजूर नहीं है। 18 मार्च को दिल्ली की नाकाबंदी करके किसान अपना विरोध जताएंगे।

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