फसली विभिन्नता से बढ़ रहा किन्नू का रकबा

Ludhiana Updated Mon, 24 Dec 2012 05:31 AM IST
मुक्तसर। राज्य सरकार द्वारा फसल विभिन्नता के तहत किसानों को बागबानी के प्रति उत्साहित करने के लिए किए जा रहे प्रयत्नों की बदौलत फाजिल्का किन्नू उत्पादन में पहले, होशियारपुर दूसरे और मुक्तसर तीसरे स्थान पर है। किसानों द्वारा फसली विभिन्नता अपनाते हुए बागबानी से जुड़ने के कारण मुक्तसर में धीरे-धीरे किन्नू का रकबा बढ़ रहा है। यह जानकारी बागबानी विभाग चंडीगढ़ के डिप्टी ज्वाइंट डायरेक्टर गुरकंवल सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि इस समय फाजिल्का में करीब 22 हजार 228 हैक्टेयर रकबे और होशियारपुर में करीब छह हजार हैक्टेयर रकबे में किन्नू की काश्त हो रही है। वहीं मुक्तसर 5,343 हैक्टेयर रकबे में किन्नू की काश्त करके तीसरे स्थान पर चल रहा है, जबकि फाजिल्का, होशियारपुर और मुक्तसर समेत पूरे पंजाब में अन्य जिलों को मिलाकर इस समय करीब 44 हजार हैक्टेयर रक बे में किन्नू काश्त हो रही है, जिनमें बठिंडा और मानसा भी शामिल हैं।
कहां कितना उत्पादन
फाजिल्का - 22 हजार 228 हैक्टेयर रकबा
होशियारपुर - करीब छह हजार हैक्टेयर रकबा
मुक्तसर - 5,343 हैक्टेयर रकबा

गांव बादल में राज्य सरकार द्वारा स्थापित सिटरस एस्टेट मुक्तसर में किन्नू क्रांति लाने में अहम भूमिका निभा रहा है। डीसी परमजीत सिंह ने बताया कि बागबानी को उत्साहित करने के लिए सरकार सब्सिडी दे रही है। नए बाग लगाने से लेकर उनके पालन-पोषण तक करने में सरकार मदद कर रही है। किसानों को नई तकनीकें और आवश्यक औजार मुहैया कराने के लिए गांव बादल में सिटरस एस्टेट स्थापित किया गया है। लगभग 84 लाख रुपये की लागत से तैयार इस सिटरस एस्टेट की इमारत में 65 लाख रुपये कीमत के कृषि औजार ट्रैक्टर, हाईड्रो कटर एंड प्रूनर, स्प्रेयर, डिग्गर, रोटावेटर आदि हैं। किसान नाममात्र किराए पर यह अति आधुनिक औजार ले जाकर बागों की देखभाल बहुत अच्छे तरीके से कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि बहुत जल्दी ही राज्य सरकार द्वारा 90 लाख रुपये की लागत से एक अति आधुनिक प्रयोगशाला भी स्थापित की जा रही है।
कैंसर से बचाता है किन्नू
माहिरों की मानी जाए तो किन्नू कैंसर की बीमारी से भी बचाता है। सिटरस एस्टेट बादल के बागबानी अधिकारी लखविंदर सिंह ने बताया कि मेडिकल नजरिए से देखा जाए तो किन्नू में काफी चमत्कारी गुण होते हैं। उन्होंने बताया कि अमरीका में हुई माहिरों की इस विषय पर खोज में भी यह खुलासा हुआ है कि किन्नू में लिमोनोऑयड नामक कैंसर की रोकथाम करने वाला तत्व बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। किन्नू के जूस में 15 से 20 पीपीएम, उसके छिलके में 60-80 पीपीएम और बीजों में 2,500 पीपीएम तक लिमोनिन ग्लूकोसाइड तत्व पाया जाता है, जो कैंसर को रोकता है। यह तत्व खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है। किन्नू विटामिन सी के साथ-साथ विटामिन ए और पोटाश का भी प्रमुख स्तोत्र है। उन्होंने बताया कि हालांकि संतरे में भी लिमोनोऑयड पाए जाते हैं, मगर किन्नू में यह तत्व बहुतायत मात्रा में होते हैं। किन्नू में कैंसर रोकने के तत्व के अलावा एचआईवी वायरस रोकने वाले तत्व भी पाए जाते हैं।


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