नामधारी संप्रदाय के उत्तराधिकारी पर विवाद गहराया

Ludhiana Updated Wed, 19 Dec 2012 05:31 AM IST
लुधियाना। नामधारी संप्रदाय के सतगुरु जगजीत सिंह के निधन के बाद उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ नामधारी मुख्यालय में ठाकुर उदय सिंह को सतगुरु जगजीत सिंह का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ इंटरनेशनल नामधारी संगत (आईएनएस) ठाकुर दलीप सिंह को सतगुरु बनाने पर अडिग है।
मंगलवार को आईएनएस के सदस्यों ने विश्वकर्मा चौक में नामधारी दरबार के प्रधान एचएस हंसपाल और वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरिंदर सिंह लायल के पुतले फूंके। आईएनएस ने आरोप लगाया कि दोनों अपने राजनीतिक हितों के कारण पंथ में फूट डालने का प्रयास कर रहे हैं। लंबे अर्से से इनके प्रयास जारी हैं, लेकिन अब संगत इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। रोष प्रदर्शन के दौरान संगत ने दोनों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इंटरनेशनल नामधारी संगत के प्रधान नवतेज सिंह और चेयरमैन जसविंदर सिंह ने दोनों को चेताया कि वह पंथ में दरार डालने की कोशिश न करें। उन्होंने कहा कि हंसपाल और सुरिंदर ने संप्रदाय में फूट डालने की कोशिशों और अपने हितों को साधने के लिए ही ठाकुर दलीप सिंह जी की जगह ठाकुर उदय सिंह जी को भैणी साहिब का प्रमुख स्थापित करवाया है। जो सतगुरु जगजीत सिंह जी के वचनों का सीधे तौर पर उल्लंघन है।
भैणी साहिब में ठाकुर उदय सिंह जी की जल्दबाजी में करवाई गई ताजपोशी पर उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने राजनीतिक क्षेत्र में पकड़ बनाए रखने और संगत में दहशत का माहौल कायम करने के इरादों से ही खाकी के साये में सतगुरु जगजीत सिंह के आध्यात्मिक वारिस का ऐलान कर दिया। दोनों को डर था कि संगत की बहुसंख्या तो ठाकुर दलीप सिंह जी के हक में है। यदि संगत ने दलीप सिंह जी को अपना गुरु मान लिया तो उन की राजनीतिक दुकान बंद हो जाएगी। जिसका राजनीतिक क्षेत्र पर भी प्रभाव पड़ने से वहां भी उनकी पैठ खत्म हो जाएगी।
उन्होंने नामधारी संगत को दोनों से सचेत करते हुए कहा कि वह एकजुट होकर कौम को दोफाड़ करने वालों को भैणी साहिब से बाहर का रास्ता दिखाएं। प्रधान नवतेज ने कहा कि हालत यह है कि ठाकुर दलीप सिंह को श्री भैणी साहिब नहीं आने दिया जाता। सतगुरु जगजीत सिंह जब अस्पताल में भर्ती थे और उनके निधन एवं अंतिम संस्कार के अवसर पर भी ठाकुर दलीप सिंह को वहां नहीं आने दिया गया। नवतेज ने साफ किया कि 21 दिसंबर को सिरसा के जीवन नगर में संगत अपना फैसला लेगी। उन्होंने सरकार से भी आग्रह किया कि उनके धार्मिक मामले में पुलिस और प्रशासन दखल न दें। इस मौके पर महासचिव रणजीत सिंह नामधारी, कोषाध्यक्ष गुरमीत सिंह नामधारी, बचित्तर सिंह, अरविंदर सिंह भुजी, हरविंदर सिंह, राजवंत सिंह, गुरप्रीत सिंह, संगत सिंह, कुलवंत सिंह, बसंत सिंह, सुखदेव सिंह, जसपाल सिंह, गुरदेव सिंह, मिल्खा सिंह, रघबीर सिंह बीरी और जसपाल सिंह धंजल उपस्थित थे।

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