शाम की अदालतें लगाने का विरोध

Ludhiana Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
मोगा। हाईकोर्ट और केंद्र सरकार की ओर से सभी जिला और सब डिवीजनल हेडक्वार्टरों पर शाम की अदालतें लगाने के निर्देशों के खिलाफ पंजाब की बार एसोसिएशनों के जिलाध्यक्षों का एक प्रतिनिधिमंडल कानून मंत्री अश्वनी कु मार से मिला। इसकी अगुवाई कनवीनर समूह जिला और सब डिवीजनल बार एसोसिएशन पंजाब के एडवोकेट सुनील गर्ग ने की। वफद ने अपनी मांगों के संबंध में मांग पत्र सौंपा। कानून मंत्री ने मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया।
इस मौके पर एडवोकेट सुनील गर्ग के अतिरिक्त बठिंडा के अध्यक्ष रणजीत सिंह जलाल, कपूरथला के अध्यक्ष जेजेएस अरोड़ा, लुधियाना के अध्यक्ष जगमोहन सिंह वडै़च, जालंधर के अध्यक्ष जेएस पीलिया, संगरूर के अध्यक्ष गुरतेज सिंह ग्रेवाल, मोहाली के अध्यक्ष अमरजीत सिंह लौंगिया, फतेहगढ़ साहिब एएस धारनी सहित अन्य जिलों के बार एसोसिएशनों के अध्यक्ष और सीनियर वकील उपस्थित थे।
क्या है मांगें
कानून मंत्री को दिए मांग पत्र में वकीलों ने मांग उठाई है कि सरकारी विभागों, माननीय हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट की भांति हमें भी शनिवार का अवकाश दिया जाए। शाम की अदालतों के फैसले को वापस लिया जाए। सब डिवीजनल और जिला अदालतों में छुट्टियों के संबंध में माननीय हाईकोर्ट की तरह एक ही प्रावधान होना चाहिए। किसी भी तरह इस संबंध में टू टायर सिस्टम नहीं होना चाहिए। वकीलों ने अपनी विशेष मांग उनके ध्यान में लाते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जजों और उनके कर्मचारियों को शाम की अदालतों के लिए 25 प्रतिशत अधिक वेतन देने का प्रस्ताव रखा गया है, लेकिन वकीलों को किसी भी प्रकार का कोई इंसेंटिव देने का प्रस्ताव नहीं रखा गया।




फोटो परिचय : कानून मंत्री को मिल मांग पत्र देते जिला बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट सुनील गर्ग।
फोटो नंबर-10 मोगा 1 जेपीजी

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