मुझे तो राजनीति में मिले डॉक्टरेट : बादल

Ludhiana Updated Sun, 09 Dec 2012 05:30 AM IST
लुधियाना। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल शनिवार को अपने 87वें जन्मदिन पर डॉक्टर बन गए। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) की गोल्डन जुबली सालाना कनवोकेशन में शनिवार को विश्वविद्यालय के चांसलर और राज्यपाल शिवराज पाटिल ने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया।
इस मौके पर बादल ने कहा कि इससे उनके बचपन की ख्वाहिश पूरी हो गई, वहीं उन्होंने अपने भाषण में यह भी कहा कि उन्होंने स्नातक तक शिक्षा हासिल की है और वह इस डिग्री के काबिल नहीं हैं, हां, उनको राजनीति में डॉक्टरेट की डिग्री जरूर दी जा सकती है। बादल की इस टिप्पणी पर पीएयू के चांसलर और राज्यपाल शिवराज पाटिल ने सफाई दी कि सीएम बादल को राजनीति का लंबा अनुभव है। इसके अलावा उनको हर क्षेत्र में अच्छा तजुर्बा है, इसलिए वे डॉक्टरेट की मानद उपाधि के लिए पूरी तरह फिट और हकदार हैं।
बचपन कर सपना हुआ पूरा
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की बचपन से ही डॉक्टर बनने की तमन्ना थी। अक्सर कालेजों के कार्यक्रम में युवाओं के रूबरू होते समय बादल इस बात की चर्चा करते रहते हैं। कुछ दिन पहले ही देवकी देवी जैन कालेज के कार्यक्रम में भी सीएम ने बताया था कि दसवीं पास करने के बाद उन्होंने ग्यारहवीं में मेडिकल विषय ले लिए लेकिन मेडिकल की पढ़ाई काफी मुश्किल लगी और उन्हें समझ आया कि डॉक्टर बनना इतना आसान नहीं है। इसलिए उन्होंने मेडिकल छोड़ आर्ट्स ले लिया और इसी में स्नातक की डिग्री हासिल कर ली। नतीजतन डॉक्टर बनने की तमन्ना दिल में ही रह गई और सीएम बादल ने राजनीति के क्षेत्र में अपने तजुर्बे के साथ देश की राजनीति में एक अलग पहचान बना ली।
शनिवार को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने अपना 87वां जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने उनको डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित कर उनका सपना पूरा कर दिया। इस अवसर पर समारोह में उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका अभिनंदन किया और राजनीति के क्षेत्र में उनकी देन की सराहना की।

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