रात में 12 घंटे बिजली दो, रेट तीन रुपये हो

Ludhiana Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
लुधियाना। पंजाब में कई दशक पहले बिजली काफी सस्ती थी, नतीजतन राज्य में तेजी से उद्योग स्थापित हो गए, लेकिन अब इंडक्शन फर्नेस उद्योग को 6.20 रुपये प्रति यूनिट में बिजली मिल रही है। फर्नेस उद्योग में बिजली कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल हो रही है। महंगी बिजली के कारण इंडस्ट्री की वायेबिलिटी नहीं निकल पा रही है। उद्यमियों का दावा है कि प्रति टन उत्पादन करने पर 1500 रुपये का लॉस हो रहा है। नार्दर्न इंडिया इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन ने सरकार से दो टूक कहा है कि उद्योग को केवल रात के समय 12 घंटे बिजली दी जाए, लेकिन प्रति यूनिट दाम तीन रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए। उद्यमियों का तर्क है कि गुजरात और तमिलनाडु में उद्योगों को रात के समय तीन रुपये से भी कम दर पर बिजली मुहैया कराई जा रही है।
एसोसिएशन के प्रधान केके गर्ग का कहना है कि महंगी बिजली के कारण इंडस्ट्री की वायेबिलिटी खत्म हो गई है। फिलहाल स्क्रैप से इंगट बनाने का कनवर्जन चार्ज छह हजार रुपये मिल पा रहे हैं, जबकि लागत 7500 रुपये आ रही है। ऐसे में प्रति टन उत्पादन करने पर 1500 रुपये का नुकसान हो रहा है। इसलिए पंजाब की इंडक्शन फर्नेस इंडस्ट्री अपनी उत्पादन क्षमता का केवल 25 फीसदी ही इस्तेमाल कर पा रही है। दिन में केवल आठ घंटे मुश्किल से ही इकाइयों को चलाया जा रहा है। कम उत्पादन के कारण मजबूरन लेबर में कटौती करना पड़ रहा है। इंडस्ट्री ने अपनी लेबर में तीस फीसदी की कटौती कर दी है। इससे राज्य के इंडक्शन फर्नेस उद्योग से लगभग बीस हजार मजदूर आउट हो गए हैं।
गर्ग के अनुसार पंजाब सरकार के पास उद्योगों को प्रोत्साहित करने की न कोई नीति है और न ही कोई इंसेंटिव दिए जा रहे हैं, उल्टा मौजूदा उद्योगों पर शिकंजा कस कर उनको बर्बादी की ओर धकेला जा रहा है। इससे उद्यमी मायूस हैं। गर्ग ने कहा कि आर्थिक मंदी के कारण इंजीनियरिंग उद्योग में भी स्टील की मांग कम बनी हुई है। इसलिए बाजार में ज्यादा उतार चढ़ाव नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में मंदी का दौर जारी रह सकता है।

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