धान का विकल्प बन सकती है मक्की

Ludhiana Updated Fri, 30 Nov 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) में तीन दिन से भोजन और जीवन निर्वाह की सुरक्षा के लिए पायदार खेती विषय पर चल रही कांफ्रेंस वीरवार को समाप्त हो गई। समापन समारोह में विश्व प्रसिद्ध धान वैज्ञानिक एवं पीएयू के पुराने विद्यार्थी डा. गुरदेव सिंह खुश खास तौर पर उपस्थित रहे। डा. खुश ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों के लिए अंतरराष्ट्रीय खोज संस्थानों में सहयोग और ज्ञान पर आपसी तालमेल जरूरी है। मौजूदा परिस्थितियों में गेहूं धान के फसल चक्र को तोड़ना अनिवार्य हो गया है। धान को कम करना मजबूरी बन गया है, क्योंकि सीमित जल स्रोत का भविष्य में अंधाधुंध इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अब किसान की दिक्कत यह है कि वह अन्य फसलों से धान के मुकाबले कमाई नहीं ले सकता। इसलिए विविधिकरण को अपनाने के लिए फिलहाल कोई तैयार नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र का दबाव बना कर इस तरफ ध्यान आकर्षित किया जा सकता है। हाईब्रिड मक्की एवं जिनेटिक सुधार के जरिए विकसित मक्की की फसल से धान के बराबर कमाई ली जा सकती है। डा. खुश ने कहा कि हाईब्रिड मक्की ही कृषि विविधिकरण को प्रोत्साहित कर सकती है। लेकिन इसका मंडीकरण एवं एमएसपी यकीनी बनाना होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करके फल एवं सब्जियों के तहत रकबा भी बढ़ाया जा सकता है। डा. खुश ने सुझाव दिया कि अब सफल किसान के साथ साथ सफल उद्यमी भी तैयार करने होंगे। ताकि कच्ची फसल से पकवान बना कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिक्री किए जा सकें ।
पीएयू के वाइस चांसलर डा. बलदेव सिंह ढिल्लों ने देश विदेश से आए माहिरों का धन्यवाद किया। वीरवार को प्राकृतिक संसाधनों की संभाल पर हुई चर्चा में भूमि की सेहत को बिगड़ने से बचाने के लिए तुरंत तकनीकी और नीतिगत फै सलेे लेने की जरूरत पर जोर दिया गया। भूमि में जैविक कार्बन बढ़ाना जरूरी है, ताकि सेहत को सुरक्षित रखा जा सके। बारिश के पानी को संभाल कर रखने की जरूरत पर जोर दिया गया। कांफ्रेंस में डा. सर्बजीत सिंह ने फसल सुरक्षा और मौसमी खतरों पर चर्चा की। इस कांफ्रेंस में 1100 से अधिक खोज पत्रों पर चर्चा की गई।

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