शारजाह में फंसे 17 भारतीयों की रिहाई का मामला

Ludhiana Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
हलवारा (लुधियाना)। शारजाह में कानूनी दांव पेच के कारण रिहाई को तरस रहे 17 भारतीयों को अब उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी है। शारजाह की अपील अदालत में बुधवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मुश्ताक अहमद को कड़ी फटकार लगाते हुए जजों के बेंच ने 13 दिसंबर को इस केस का फैसला सुनाने का आदेश जारी कर दिया।
अपील अदालत ने मुश्ताक अहमद को घटना होने के वक्त उसकी पगार और वह कहां नौकरी करता था, मौजूदा समय में उसकी कितनी पगार है, संबंधित तमाम दस्तावेज अदालत में जमा कराने के आदेश दिए थे। पिछली तीन सुनवाई और आज की सुनवाई के दौरान भी मुश्ताक अहमद अदालत को जानकारी देने में नाकाम रहा। न्यायाधीश ने मुश्ताक को अदालत का वक्त बर्बाद करने के कारण फटकारा और 13 दिसंबर की तारीख तय कर दी।
यूएई में होटल व्यवसायी एसपी सिंह ओबराय ने बताया कि लंबी जद्दोजहद और कानूनी प्रक्रिया के बाद अब फिर से रिहाई की उम्मीद बंधी है। ओबराय को उम्मीद है कि 13 दिसंबर को अच्छी खबर आएगी। ओबराय ने कहा कि पाकिस्तान से आए मुश्ताक के भाई शाहिद इकबाल की मेडिकल रिपोर्ट को अदालत पहले ही रद कर चुकी है। अब मुश्ताक भी अदालत में दस्तावेज जमा नहीं करा सका। इसलिए उम्मीद है कि फैसला उनके हक में ही आएगा।
शराब की तस्करी को लेकर जनवरी 2009 में शारजाह स्थित सीमेंट इकाई के पास दो गुटों में खूनी संघर्ष हुआ था। इसमें पाकिस्तानी नागरिक मिश्री खान की मौत हो गई थी। जबकि मुश्ताक एवं शाहिद जख्मी हुए थे। ओबराय के नेतृत्व में पंजाबी समुदाय के लोगों ने मिश्री खान के परिवार को आठ करोड़ रुपये पाक मुद्रा में ब्लड मनी देकर 17 भारतीय युवकों की फांसी की सजा माफ करा ली थी। लेकिन मुश्ताक एवं शाहिद ने मुआवजे के लिए अलग से केस दायर कर दिए। अब इन केसों पर सुनवाई चल रही है। ओबराय ने कहा कि यदि अदालत 13 दिसंबर को रिहाई के आदेश जारी करती है तो वह खुद युवकों को लेकर भारत आएंगे।

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