सरकारी अस्पतालों में ही निजी प्रैक्टिस

Ludhiana Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
मोगा। सरकारी डाक्टरों के निजी प्रैक्टिस करने के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का डाक्टरों ने एक नया तोड़ ढूंढ निकाला है। डाक्टर मरीजों को भर्ती तो सरकारी अस्पतालों में कर रहे हैं लेकिन उनका इलाज निजी तौर पर कर रहे हैं। मोगा में तैनात एक सरकारी डाक्टर के खिलाफ विजिलेंस विभाग को आनलाइन शिकायत मिली है, जिससे सरकारी अस्पतालों में निजी प्रैक्टिस करने का खुलासा हुआ है।
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की ओर से 29 अक्तूबर से 4 नवंबर तक विजिलेंस जागरूकता अभियान के तहत लोगों को टोल फ्री नंबर और ईमेल से भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज करवाने की सुविधा चालू की गई थी। इस अभियान के बाद विजिलेंस विभाग को एक आनलाइन शिकायत मिली। जिसमें मोगा में तैनात एक सरकारी डाक्टर पर सरकारी अस्पताल में ही निजी तौर पर पैसे एेंठने का आरोप लगा है। विजिलेंस विभाग ने इस मामले की जांच मोगा में तैनात विजिलेंस इंस्पेक्टर बाज सिंह को सौंपी है। विजिलेंस ब्यूरो ने संबंधित डाक्टर के बयान दर्ज कर लिए हैं और शिकायतकर्ता अपनी शिकायत से पलट गया है।
विजिलेंस की जांच में खुलासा हुआ कि डाक्टर मरीजों को सिविल अस्पताल के सामने दुकानों से दवाइयां खरीदने को मजबूर करते हैं। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड एवं सीटी स्कैन के नाम पर भी मरीजों का शोषण किया जा रहा है। मेडिकल शॉप के अलावा सीटी स्कैन व अल्ट्रासाउंड केंद्रों से डाक्टर मोटा कमीशन वसूल करते हैं। मेडिसन दुकान मालिकों ने एक-एक आदमी अस्पताल में डाक्टरों के इर्द-गिर्द बैठा रखा है और वे मरीज को खींच कर अपनी दुकान पर ले जाते हैं।
डीएसपी विजिलेंस विक्रमजीत सिंह ने पुष्टि की है कि सिविल अस्पताल के एक डाक्टर के खिलाफ आनलाइन शिकायत मिली है। इस शिकायत की जांच चल रही है। उन्होंने लोगों को अपील की कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने पर कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी माना कि लोग विजिलेंस को शिकायत करने से भी टालमटोल करते है।
सिविल सर्जन डा. सुबोध गुप्ता ने कहा कि सिविल अस्पताल में निजी प्रैक्टिस करने संबंधी मिली शिकायतों पर जांच करवाई जाएगी और सरकार की हिदायतों का पालन किया जाएगा।
कुछ दिन पहले आया था एक मामला
मोगा सिविल अस्पताल में कुछ दिन पहले एक महिला की ओर से जच्चा-बच्चा वार्ड के बाहर बच्चे को जन्म देने की घटना के बाद डाक्टरों के निजी प्रेक्टिस करने का खुलासा हुआ है। पीड़ित महिला की प्रसव की पीड़ा से चिल्ला रही थी लेकिन महिला डाक्टर को उसकी पीड़ा नहीं सुनाई दी। बाद में पता चला था कि महिला डाक्टर अपने सरकारी निवास पर मरीजों की जांच कर रही थी। इस मामले की विभागीय जांच चल रही है।

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