संभाल, मंडीकरण और बागबानी शिक्षा के लिए नए प्रयास जरूरी

Ludhiana Updated Fri, 09 Nov 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में भारतीय बागबानी सोेसाइटी की तरफ से करवाई जा रही चार दिवसीय पांचवीं बागबानी कांग्रेस के तीसरे दिन देश-विदेश से आए बागबानी माहिरों ने इस बात पर जोर दिया कि फल और सब्जियों को तोड़ने के बाद उनकी संभाल, मंडीकरण नीतियों और बागबानी शिक्षा के बारे में नए प्रयास किए जाने चाहिए। माहिरों ने कहा कि देश की खुराक और वातावरण सुरक्षा के लिए हमें ज्यादा फल और सब्जियां पैदा करने के साथ-साथ उनको तोड़ने के बाद संभाल करने के लिए सही जानकारी देने की जरूरत है।
कांग्रेस में माहिरों ने कहा कि बागबानी संबंधी मंडीकरण को भी पुरानी तकनीक से निकाल कर विश्व स्तरीय बनाने की जरूरत है। इस दौरान आ रही चुनौतियों पर चर्चा करते हुए माहिरों ने कहा कि इसमें भी आधुनिक सोच और अंतरराष्ट्रीय ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ाने की जरूरत है। नई दिल्ली, आंध्र प्रदेश, बंगलूरू और पंजाब के बागबानी माहिरों ने उद्योग की जरूरत की जानकारी ग्रहण की। फल और सब्जियों का ताजापन कायम रखने पर चर्चा की गई। प्रोसेसिंग तकनीकों के साथ फल और सब्जियों को खपतकार तक ज्यादा मात्रा में पहुंचाया जा सकता है। इससे नुकसान कम होगा और पौष्टिक सुरक्षा भी बढ़ेगी।
बागबानी शिक्षा के बारे में पीएयू के पोस्ट ग्रेजुएट के पूर्व डीन डा. बलदेव सिंह ढिल्लों ने कहा कि विश्व स्तरीय बागबानी शिक्षा के साथ खोज और टेक्नोलॉजी विकास जरूरी है। भारत की खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी की लगभग 56 कृषि यूनिवर्सिटियां बागबानी शिक्षा को बागबानी विकास के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत में कर्नाटक ही एक ऐसा राज्य है, जिसमें 6 कृषि यूनिवर्सिटी इस समय काम कर रही हैं।
माहिरों ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि मंडीकरण की बनावट को सुधार लाने की जरूरत है। तकनीकी सेशन की प्रधानगी करते हुए विश्व नोनी खोज फाउंडेशन चेन्नई के चेयर परसन डा. कीर्ति सिंह, सेंट्रल यूनिवर्सिटी आफ पंजाब बठिंडा के चांसलर डा. सरदारा सिंह जौहल, पीएयू प्रबंधकी बोर्ड के सदस्य और आलू बीज तैयार करने वाले राष्ट्रीय प्रसिद्धि प्राप्त किसान जंग बहादुर सिंह संघा ने अपने विचार व्यक्त किए।

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