‘अपनों’ से बात होते ही आई जान में जान

Ludhiana Updated Thu, 01 Nov 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। अमरिका के न्यूयार्क एवं न्यू जर्सी समेत कई इलाकों में आए भयंकर चक्रवाती तूफान सैंडी के कहर की धमक सात समंदर पार पंजाब में भी साफ दिखाई दे रही है। अमेरिका के इन इलाकों में सैकड़ों पंजाबी परिवार दशकों से रह रहे हैं, लेकिन ऐसा मंजर पहली बार दिखाई दिया है। पंजाबी अपने रिश्तेदारों, मित्रों की आवाज सुनने के लिए मोबाइल से लगातार संपर्क कर रहे हैं, जब अपनों से बात हो जाती है तब जान में जान आती है। अपनों का कुशलक्षेम पूछने के बाद ही चेहरे पर मुस्कराहट संकेत करती है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद सब ठीक ठाक है।
एक माह पहले ही न्यू जर्सी से मित्रों को पंजाब में मिलने आए अनिवासी भारतीय हरजीत सिंह भी सैंडी के कहर से बेचैन हो उठे, क्योंकि उनकी मां, पत्नी, दो बच्चे और भाई न्यू जर्सी में ही रह रहे हैं। मंगलवार से ही वह अपने परिवार का हाल जानने को परेशान थे, बार बार मोबाइल पर फोन नंबर डायल करने में व्यस्त थी, लेकिन फोन नहीं मिल पा रहा था। बुधवार की सुबह फिर से फोन लगाया गया, परिवार से बात हुई तो चेहरे पर रौनक लौट आई।
यह हाल हर पंजाबी का है, जिसके परिवार के लोग अमेरिका में रह रहे हैं। हरजीत के परिवार के पास न्यू जर्सी के बरलिंगटन एवं वार्डन टाऊन शहरों में दस गैस स्टेशन हैं। पिछले बीस साल से उनका परिवार अमेरिका में रह रहा है। सैंडी की मार से हरजीत के चार गैस स्टेशन पूरी तरह तबाह हो गए हैं, जबकि बाकी भी बिजली न मिलने से ठप पड़े हैं। इस तूफान से उनके परिवार को डेढ़ लाख डालर का नुकसान हुआ है। उनका शहर समुद्र से 40 मील तक अंदर है, बावजूद इसके सैंडी की चपेट में आ गया। हरजीत की दो नवंबर की वापसी के लिए फ्लाइट थी, लेकिन मौजूदा स्थिति देखते हुए उनको लग रहा है कि अभी कुछ दिन और यहीं रुकना पड़ेगा। उधर एथलेटिक कोच हरिंदर सिंह की भी दो बहनें न्यू जर्सी एवं न्यूयार्क में रह रही हैं। हरिंदर की मंगलवार को उनसे बात हो गई थी, लेकिन आज फोन नहीं लग रहा था, इसे लेकर वह काफी चिंतित रहे। उधर बाबा बंदा सिंह बहादुर इंटरनेशनल फाउंडेशन के चेयरमैन केके बावा ने कहा है कि इस वक्त केंद्र सरकार भी अमेरिका के साथ संपर्क साधकर भारतीयों की स्थिति और हालत के बारे में लोगों से अपडेट करे।

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