अपनी ही सरकार में सुरक्षित नहीं अकाली नेता

Ludhiana Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
मोगा। गांव बिलासपुर में बरनाला के पूर्व विधायक मलकीत सिंह कीतू की हत्या से सियासी गलियारों में बैचेनी है। अकाली नेता अपनी ही सरकार में सुरक्षित नहीं दिख रहे। मोगा में कुछ अरसे में चार अकाली नेताओं की हत्या हो चुकी है। पुलिस रिकार्ड के अनुसार भी मोगा में दस माह के दौरान कीतू समेत 32 लोगों की हत्या हो चुकी है। कीतू गरीबों का सहारा बन गए थे। सोमवार को प्रशंसक अपने नेता का शव देखकर फफक-फफक कर रो रहे थे।
निहाल सिंह वाला सब डिवीजन अंतर्गत गांव खाई के पूर्व सरपंच व ट्रक यूनियन निहाल सिंह वाला के अध्यक्ष, जिला परिषद सदस्य अकाली नेता गुरमेल सिंह खाई का इसी वर्ष 6 जुलाई को उनके गांव में ही कत्ल कर दिया गया था। सरकार ने गुरमेल सिंह को भी सरकारी गनर दे रखे थे। इसके अलावा इसी सब डिवीजन के गांव दौधर निवासी पूर्व सरपंच रशपाल सिंह व उसके गनर की हत्या कर दी गई थी। इससे पहले सब डिवीजन के गांव गाजियाना के सरपंच इंद्रजीत हैपी की भी गोलियों से हत्या कर दी गई।
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के करीबी माने जाते मलकीत सिंह कीतू 1997 के विधानसभा चुनाव में बरनाला विधानसभा हलके से निर्दलीय विधायक बने थे और उन्होंने अकाली दल का दामन थाम लिया था। इसके बाद फरवरी 2002 के विधानसभा चुनाव में अकाली टिकट पर विधायक चुने गए और फरवरी 2007 व जनवरी 2012 का चुनाव हार गए थे।
वर्तमान में वे पंजाब भर की ट्रक यूनियनों के अध्यक्ष थे और उनकी पत्नी गुरदीप कौर गांव की सरपंच हैं। मलकीत सिंह कीतू की अपनी कोई संतान न होने कारण उन्होंने अपनी बहन के बेटे कुलवंत को बचपन में गोद लिया था। कुलवंत सिंह भी गांव का सरपंच रह चुका है। कांग्रेस सरकार के समय विधायक होते हुए उनके खिलाफ शराब तस्करी के मामले भी दर्ज किए गए थे। कीतू को समाज सेवा के क्षेत्र में भी अहम हस्ती माना जाता था। हर साल अपने गांव की गरीब कन्याओं की शादी कराते थे और विधवा व बेसहारा महिलाओं को रोजगार के लिए सिलाई मशीनें आवंटित करते थे।

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