सियासत करना भी सोक्खा नहीं ःसीएम

Ludhiana Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। सूबे में पांचवीं बार सत्ता की बागडोर संभाल रहे शिरोमणि अकाली दल (शिअद) सुप्रीमो एवं मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का मानना है कि सियासत भी सोक्खी (आसान) नहीं है। दशकों की सियासत के दौरान अनेक अड़चनें आईं, उतार चढ़ाव आए, यहां तक की जीवन के पंद्रह साल जेल में भी गुजारे, लेकिन बच्चों यह मत समझना कि मैंने कोई जुर्म किया था। राज्य में सियासत की धुरी कहलाने वाले बादल ने रविवार को देवकी देवी जैन कालेज की छात्राओं के साथ अपने जीवन के अहम पहलू साझा किए। सीएम ने मंच से छात्राओं के साथ अपने कैरियर और इच्छाओं से अवगत करा, इसमें कुदरत की मर्जी को अहम करार दिया। मुख्यमंत्री बादल ने कहा कि बचपन से ही उनकी तमन्ना डाक्टर बनने की थी। अपने लक्ष्य को पाने के लिए दसवीं कक्षा के बाद मेडिकल के विषय ले लिए, लेकिन मेडिकल की पढ़ाई काफी कठिन थी, इसे देखकर लगा कि डाक्टर बनना सोक्खा नहीं है। नतीजतन मेडिकल की पढ़ाई छोड़ कर ऑर्ट्स ले लिया और स्नातक की डिग्री हासिल कर ली।
बीए करने के बाद सोचा की अब वकील बनना बेहतर होगा। इसे देखते हुए लॉ कालेज में दाखिला ले लिया, लेकिन कुदरत को यह भी मंजूर नहीं था। तब बादल ने अपने गुरु ज्ञानी करतार सिंह से कहा कि मुझे अफसर बनवा दो। ज्ञानी जी बादल की राजनीतिक सोच और कुशलता को परख गए थे, लेकिन उन्होंने बादल की बात का मान रखा। सीएम ने कहा कि उस वक्त पीसीएस के लिए मनोनीत किया जाता था, सो मेरे कहने पर ज्ञानी जी ने मुझे पीसीएस में नियुक्ति का पत्र थमा दिया। साथ ही यह भी बता दिया कि बादल तुमने नौकरी नहीं करनी, तुमने तो लोगों को नौकरियां देनी हैं। सो कुदरत को यह भी मंजूर नहीं था।
इसके बाद से राजनीति को ही अपने जीवन का अहम हिस्सा बना लिया और कुदरत की मर्जी से आज सियासत का मुनि बन गया।

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